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प्रमोशन में आरक्षण: उत्तराखंड सरकार ने एकतरफा निर्णय लिया तो देश भर में होगा आंदोलन

Sat, 14 Mar 2020 07:59 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • प्रमोशन में आरक्षण खत्म करने पर फेडरेशन ने दी सरकार को चेतावनी
  • प्रदेश के सभी जनपदों में होगी बुद्धि शुद्धि स्तुति
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड एससी एसटी इम्पलाइज फेडरेशन के अध्यक्ष करम राम ने कहा कि सामान्य वर्ग के दबाव में आकर सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर एक तरफा निर्णय लिया तो उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश में आंदोलन किया जाएगा। रविवार को प्रदेश के सभी जनपदों में एससी एसटी कर्मचारी बुद्धि शुद्धि स्तुति कर सरकार को सद् बुद्धि देने के लिए प्रार्थना करेंगे।

 

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शनिवार को परेड ग्राउंड स्थित एक रेस्टोरेंट में प्रेसवार्ता में फेडरेशन के अध्यक्ष ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि प्रमोशन में आरक्षण खत्म किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिए कि एससी एसटी का प्रतिनिधित्व पूरा हो रहा है या नहीं, सरकार इसका डाटा तैयार करे। उन्होंने कहा कि एससी एसटी वर्ग के आधे पदों को सीधी भर्ती और आधे पद प्रमोशन में आरक्षण के माध्यम से भरे जाते हैं। यदि सरकार प्रमोशन में आरक्षण को खत्म कर देगी तो एससी एसटी वर्ग के आधे पदों को कहां से पूरा किया जाएगा। 


सरकार कोई भी निर्णय लेने से पहले इंदु कुमार की रिपोर्ट का अध्ययन करे। यदि सरकार दबाव में गलत निर्णय लेती है, तो सड़कों पर उतर कर इसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने बताया फेडरेशन को अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ, बहुजन प्रांतीय मोर्चा, नव क्रांति संगठन, वाल्मीकि स्वच्छकार संगठन का समर्थन है। 

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करम राम ने कहा कि सरकार दोहरी नीति चल रही है। सीधी भर्ती के आरक्षण रोस्टर पर पुनर्विचार करने के लिए सरकार ने कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक की अध्यक्षता में समिति बनाई है। वहीं, दूसरी तरफ आयोगों के माध्यम से नए आरक्षण रोस्टर के आधार पर भर्ती प्रक्रिया की जा रही है। इस मौके पर फेडरेशन के विधि सलाहकार कांता प्रसाद, कोषाध्यक्ष मटन लाल, संगठन सचिव गंभीर सिंह तोमर, अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ के अध्यक्ष विशाल बिरला, नवक्रांति मोर्चा के अध्यक्ष गजेंद्र, शिव राम गौतम, राम सिंह तोमर, विजय कुमार, प्रमोद कुमार, दिनेश कुमार आदि मौजूद रहे।

आज से शुरू हुआ जन जागरण अभियान

जन आंदोलन के लिए जनरल ओबीसी कर्मचारी आज से अपने-अपने क्षेत्रों में जन जागरण अभियान चला रहे हैं। 15 मार्च तक युवाओं को आंदोलन से जोड़ा जाएगा।

सभा में ये कर्मचारी नेता रहे मौजूद

सभा को जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक जोशी, महासचिव वीरेंद्र सिंह गुसाईं, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद् के अध्यक्ष ठाकुर प्रहलाद सिंह, सूर्य प्रकाश बछेती, सुषमा कोठारी, दर्मियान सिंह सरियाल, सचिवालय संघ की रीता कौल, जगमोहन सिंह नेगी, सुनील गुसाईं, विक्रम सिंह रावत, एससी पंत, जेपी मैखुरी, रामेश्वर प्रसाद, नरेंद्र भट्ट, मुकेश ध्यान, आशुतोष सेमवाल, ललित मोहन रावत, दीपक पुरोहित, चौधरी ओमवीर सिंह, शक्ति प्रसाद भट्ट, वीके धस्माना, अंजू बडोला, बनवारी सिंह रावत, राजीव बेलवाल, आरसी शर्मा, बालकृष्ण शास्त्री, राकेश प्रसाद ममगाईं, राम सिंह चौहान, पीसी ध्यानी, अमित रजन, पवन रावत, संदीप वर्मा, पंचम सिंह बिष्ट समेत अन्य कर्मचारी नेताओं ने संबोधित किया।

हड़ताली कर्मचारियों ने किया ‘बवाल’, जबरन दफ्तर बंद कराए 

प्रमोशन में आरक्षण के विरोध में हड़ताल कर रहे कर्मचारियों का प्रदर्शन शुक्रवार को उग्र हो गया। कलेक्ट्रेट में जिला आबकारी अधिकारी के दफ्तर में काम होते देख कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान मारपीट की नौबत भी आ गई। एक आबकारी इंस्पेक्टर का आरोप है कि कर्मचारियों ने उनसे भी मारपीट की है। स्थिति को संभालने के लिए वहां आबकारी मुख्यालय से भी अधिकारी पहुंचे थे। 

जनरल और ओबीसी कर्मचारी 12 दिनों से हड़ताल पर हैं। कई दफ्तरों में आवश्यक काम होने हैं तो बहुत से कर्मचारी अफसरों के कहने पर भी काम में लगे हैं। लेकिन हड़ताली कर्मचारी उन पर भी हड़ताल में शामिल होने का दबाव बना रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी हड़ताली कर्मचारी कलेक्ट्रेट में एसडीएम दफ्तर के बाहर पहुंचे और कर्मचारियों को काम करने से रोका। 

शुक्रवार को भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति रही। पंचस्थानी चुनावालय में डीपीसी के लिए नामांकन आदि की प्रक्रिया चल रही थी। इसके साथ ही जिला आबकारी अधिकारी के दफ्तर में ठेकों के आवेदन की प्रक्रिया चल रही थी। इसी बीच हड़ताली कर्मचारियों का एक दल वहां पहुंचा और प्रदर्शन करने लगा। कुछ कर्मचारियों ने दफ्तर में तालाबंदी का भी प्रयास किया लेकिन अंदर मौजूद कुछ नेताओं के कहने पर वे मान गए। कुछ देर बाद सभी कर्मचारी बाहर आए और पहले से हो रहा काम रुकवा दिया। 
 
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12 दिन में चार गुना बढ़ गया प्रमाणपत्रों का बैकलॉग 

जनरल ओबीसी कर्मचारियों की हड़ताल के कारण प्रमाणपत्र बनवाने वाले लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 12 दिनों से प्रमाणपत्रों का बैकलॉग भी लगभग चार गुना बढ़ गया है। प्रमाणपत्र न बनने से बहुत से छात्र या अभ्यर्थी आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। 

तहसील में जनाधार केंद्र पर हर रोज 100 से 150 विभिन्न तरह के प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन किए जाते हैं। यहां नाम दर्ज होने के बाद इन आवेदनों को संबंधित तहसील में भेजा जाता है। इसके बाद संबंधित लेखपाल इनकी जांच करने के बाद निर्धारित समयावधि में आवेदनकर्ता को जारी करते हैं। वर्तमान में न काम जनाधार केंद्र पर हो रहा है और न ही तहसीलों में। ऐसे में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।  

दो माह पहले तक जनपद में जिले में प्रमाणपत्रों का बैकलॉग लगभग 700 से 800 के आसपास था। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह बैकलॉग लगभग तीन हजार के आसपास पहुंच गया है। ऑनलाइन आवेदन तो हो रहे हैं लेकिन आगे काम नहीं बढ़ पा रहा है। इससे पहले लेखपालों की कमी के चलते प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहे थे और अब हड़ताल के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। 

प्रमाणपत्र न बनने के कारण लोग विभिन्न सेवाओं और परीक्षाओं के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। वर्तमान स्थिति में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 15 तक आवेदन किए जाने थे, लेकिन आय प्रमाणपत्र न बनने के कारण लोग अपने बच्चों का दाखिला तक नहीं करा पा रहे हैं। इसी तरह विभिन्न परीक्षाओं के अभ्यर्थी भी इन्हीं प्रमाणपत्रों के कारण रुके हुए हैं। 
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