उत्तराखंड कृषि विभाग में अधिकारियों ने व्यवस्था को ताक पर रख दिया है। गंभीर मसलों में भी विभागीय अफसर मंत्री से अनुमोदन के बजाय अपने स्तर पर ही कार्रवाई कर ले रहे हैं।
मंत्री को अवगत कराने की महज खानापूर्ति
मनचाहे कदम उठाने के बाद कार्रवाई से मंत्री को अवगत कराने की खानापूर्ति जरूर की जा रही है। अफसरों का यह रवैया ही कृषि मंत्री हरक सिंह रावत की नाराजगी की वजह रहा। किसी भी मामले में हाईकोर्ट में अपील करने से पहले विभागीय मंत्री का अनुमोदन जरूरी है।
लेकिन कृषि विभाग में अफसर खुद कार्रवाई करने के बाद मंत्री को दिखा रहे थे। जानकारी के मुताबिक लोक सेवा अधिकरण से कृषि विभाग के बर्खास्त कर्मचारी के पक्ष में फैसला आने के बाद कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने कई बार अफसरों को पत्रावली प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
नियमानुसार मंत्री यह निर्देश न देते तो भी विभागीय अधिकारियों को अपील से पहले उनका अनुमोदन लेना चाहिए था। लेकिन संयुक्त सचिव देवेंद्र पालीवाल के पास मंत्री से अनुमोदन लेने का समय नहीं था। फाइल पर अपनी टिप्पणी में उन्होंने लिखा है कि ‘अपील का समय निकल रहा है।
मंत्री को अंधेरे में रखने का प्रयास
पहले अपील योजित की जाए, इसके बाद पत्रावली को कृषि मंत्री के अवलोकनार्थ प्रस्तुत किया जाए।’ सूत्रों के मुताबिक कृषि विभाग के अफसरों ने मामले में मंत्री को अंधेरे में रखने का प्रयास किया है।
सवाल यह है कि फाइल मंत्री के पास जाती तो अनुमोदन में कितना वक्त लगता। सूत्रों की मानें तो विभागीय अधिकारी जानते थे कि मंत्री के पास फाइल गई तो वे अपील योजित नहीं कर सकेंगे।