अगस्त्यमुनि के बसंत विहार, नाकोट और विजयनगर सहित आसपास के क्षेत्रों में हर बरसात में जलभराव होता है। इसका मुख्य कारण बाईपास में प्राकृतिक जल निकासी मार्गों का बाधित होना है। राष्ट्रीय राजमार्ग खंड (एनएच खंड) ने दावा किया है कि ड्रेनेज नाली निर्माण के लिए निजी भूमि उपलब्ध न होने से स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। विभाग ने इस मामले में सीमांत क्षेत्र अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष चंडी प्रसाद भट्ट से हस्तक्षेप की मांग की है।
चारधाम यात्रा और नगर में ट्रैफिक की समस्या के समाधान के लिए 2016-17 में बाईपास की डीपीआर स्वीकृत हुई थी। इसके तहत छह कल्वर्ट और तीन छोटे पुल बनने थे। बाईपास निर्माण के साथ ही नगर क्षेत्र में जलभराव की समस्या भी बढ़ गई है।
एनएच खंड की रिपोर्ट बताती है कि अतिरिक्त पानी बाईपास से नहीं आ रहा, बल्कि प्राकृतिक जल निकासी मार्ग बाधित होने से आबादी वाले क्षेत्रों में भर रहा है। एनएच खंड के अधिशासी अभियंता ओंकार पांडे ने बताया कि संयुक्त निरीक्षण में सामने आया कि बसंत विहार पहले कृषि भूमि था। आबादी बढ़ने और निर्माण कार्यों के कारण जल निकासी के पारंपरिक रास्ते बंद हो गए हैं। कई बैठकों के बावजूद स्थानीय भू-स्वामियों ने ड्रेनेज नाली निर्माण के लिए भूमि नहीं दी।
एनएच खंड ने ड्रेनेज योजना के लिए टीएचडीसी और निर्माण एजेंसी से भी सहयोग मांगा था। हालांकि, दोनों ने इसे अपने कार्यक्षेत्र से बाहर बताकर असमर्थता जताई। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित संयुक्त समिति ने सुझाव दिया है कि जनहित में आवश्यकता पड़ने पर आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत भूमि उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा सकती है।
ये भी पढे़ं...Yamunotri: हाईवे पर फंसे सैकड़ों कांवड़ यात्री, सिलाई बैंड के पास मार्ग खुलने पर मिली कुछ राहत, देखें वीडियो
अगस्त्यमुनि में जलभराव का स्थायी समाधान तभी संभव है जब स्थानीय भू-स्वामी, जनप्रतिनिधि और संबंधित विभाग मिलकर ड्रेनेज निर्माण के लिए सहमति बनाएं। तभी हर बरसात में लोगों को जलभराव से राहत मिल सकेगी। - ओंकार पांडे, अधिशासी अभियंता एनएच खंड रुद्रप्रयाग