अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र में सिर्फ पिथौरागढ़ जिला एक मात्र ऐसा है जहां साठ फीसदी से अधिक मतदान हुआ है। शेष तीन जिलों बागेश्वर में 56 और अल्मोड़ा-चंपावत जिलों में 53 फीसदी ही मतदान हुआ है।
जबकि यह मानकर चला जा रहा था कि पिथौरागढ़ के सुदूर और दुर्गम इलाकों में मतदान का प्रतिशत कम रह सकता है।
मामूली अंतर रहा था पिछले चुनाव में
पिछले लोकसभा चुनाव में भी यहां जीत-हार का अंतर सबसे कम रहा था। कांग्रेस के प्रदीप टम्टा ने भाजपा के अजट से टम्टा से यह सीट छह हजार वोट से जीती थी।
2012 में हुए विधानसभा का चुनावी गणित देंखे तो यहां के चार जिलों की 14 विधानसभाओं में कांग्रेस के पास 8 और भाजपा के पास छह विधायक हैं। बागेश्वर, अल्मोड़ा चंपावत जिलों की विधानसभाओं पर कांग्रेस-भाजपा की सीधी और बराबरी की टक्कर रही थी।
बागेश्वर में ये रहा थे परिणाम
बागेश्वर जिले की दो विधानसभाओं में कपकोट सीट कांग्रेस के ललित फर्स्वाण के पास गई थी तो बागेश्वर विधानसभा भाजपा के चंदन राम दास ने जीती।
इसी प्रकार चंपावत जिले की लोहाघाट सीट भाजपा के पूरन सिंह फर्त्याल के पास गई तो दूसरी विधानसभा चंपावत कांग्रेस के हेमेश खर्कवाल ने जीती।
दोनों दल जता रहे जीत का दावा
अल्मोड़ा जिले में छह विधानसभाएं हैं जिसमें तीन कांग्रेस के पास द्वारहाट मदन सिंह बिष्ट, अल्मोड़ा मनोज तिवारी और जागेश्वर विधानसभा सीट गोविंद सिंह कुंजवाल ने जीती थी। जबकि भाजपा ने शेष तीन सल्ट सीट सुरेन्द्र सिंह जीना ने, रानीखेत अजय भट्ट और सोमेश्वर अजय टम्टा ने जीती थीं।
पिथौरागढ़ जिले की चार में से तीन सीटों पर कांग्रेस का कब्जा रहा था। कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने धारचूला, मयूख महर ने पिथौरागढ़ और नारायणराम आर्य ने गंगोलीहाट सीटें जीती थीं जबकि एक डीडीहाट सीट भाजपा के विशन सिंह चुफाल के खाते में गई थी।
अन्य जिलों अपेक्षा पिथौरागढ़ में हुए अधिक प्रतिशत ने यहां कांग्रेस-भाजपा को उलझा दिया है। कांग्रेस मानकर चल रही है यह उसका गढ़ रहा है जिसका फायदा उसे मिलेगा। जबकि भाजपा इस मतदान प्रतिशत को अपने पक्ष में मानकर चल रही है।