धारचूला के उच्च हिमालयी क्षेत्र के लोगों पर तंत्र की मार भारी पड़ रही है। इन इलाकों में लोगों को अनाज उपलब्ध कराने के लिए हाइकोर्ट के दखल के बाद भी प्रशासन पहले तो शासन के आदेश का इंतजार करता रहा और फिर हेलीकॉप्टर के इंतजार में दूसरा दिन भी बीत गया। उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित गांवों में अब भी एक हजार से अधिक लोग फंसे हैं। इनमें बुजुर्ग भी शामिल हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी से लगातार गिर रहे तापमान, खाद्यान्न की कमी और लौटने के लिए कोई साधन नहीं होने के कारण लोग परेशान हैं।
धारचूला से माइग्रेशन के लिए हर साल बर्फ पिघलने के बाद लोग अप्रैल में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित गांवों में जाते हैं। वहां पर लोग जड़ी-बूटी और सब्जियों की खेती करते हैं। अक्तूबर में बर्फबारी शुरू होते ही लौटने लगते हैं। इस साल लीपूलेख के लिए बन रही सड़क के कारण व्यास घाटी को जाने वाला मार्ग पूरी तरह से ध्वस्त पड़ा है। इससे माइग्रेशन में गए ग्रामीण लौट नहीं पा रहे हैं। वहां पर खाद्यान्न की कमी हो गई है। बुजुर्गों की दवाइयां समाप्त हो गई हैं।
लगातार बढ़ रही ठंड से लोगों को काफी तकलीफें उठानी पड़ रही हैं। बताया जा रहा है कि बूंदी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, कुटी, रांगकांग और गुंजी गांवों में अब भी आठ सौ से अधिक ग्रामीण हैं। यह ग्रामीण एक माह से हेलीकॉप्टर सेवा संचालित करने की मांग उठा रहे हैं। कई बार शासन-प्रशासन को स्थिति से अवगत कराने के बावजूद ग्रामीणों को वापस लाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए। रास्ते और पुल ध्वस्त होने से ग्रामीणों का पैदल वापस आ पाना मुश्किल है।
वहीं, हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हरकत में आई सरकार ने प्रशासन को आदेश तो दे दिए, लेकिन स्थानीय स्तर पर हेलीकॉप्टर की कोई व्यवस्था नहीं होने से 24 घंटे के भीतर राशन नहीं भेजा जा सका। इससे प्रशासन भी पूरी तरह से लाचार नजर आया। वह पहले तो शासन के आदेश का इंतजार कर रहा। इसके हेलीकॉप्टर के इंतजार में पूरा दिन बर्बाद कर दिया।
धारचूला के एसडीएम राजकुमार पांडेय ने बताया कि शनिवार को सेना के हेलीकॉप्टरों की पिथौरागढ़ से बरेली तक ट्रायल एक्सरसाइज होने के कारण एटीसी से हेलीकॉप्टर को अनुमति नहीं मिली। इस कारण हेलीकॉप्टर धारचूला नहीं आ पाया। रविवार सुबह हेलीकॉप्टर आने की जानकारी दी गई है।
इतनी सामग्री भेजी जानी है व्यास घाटी के गांवों में
सहायक खाद्य निरीक्षक पुष्कर बोनाल ने बताया कि व्यास घाटी के लिए 80 क्विंटल गेहूं, 40 क्विंटल चावल, पांच क्विंटल चीनी, दो क्विंटल दाल, 200 पैकेट मसाले, 200 पैकेट दूध, 2 क्विंटल नमक, 400 लीटर केरोसिन, 200 पैकेट चायपत्ती और माचिस आदि रसद सामग्री तैयार कर ली गई है।
लोगों से लिया जाएगा 3100 रुपये किराया
एसडीएम आरके पांडेय ने बताया कि हेलीकॉप्टर केवल एक दिन के लिए राशन पहुंचाने आ रहा है। यदि उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों से कोई व्यक्ति धारचूला आना चाहेगा तो उससे 3100 रुपये किराया लिया जाएगा। यदि शासन की ओर से आदेश मिलेगा तो बाद में किराया वापस भी किया जा सकता है।