पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. हिमांशु पाठक और डॉ. ज्योति ने बताया कि तेंदुए की उम्र तकरीबन 12 से 14 साल रही होगी। उसके सिर, गले पर पुराने और गहरे जख्म मिले हैं। तेंदुए के दांत और सभी पंजों के नाखून पूरी तरह घिस चुके थे। इसे देखते हुए शिकारी के साथ ही डीएफओ आरके सिंह ने तेंदुए के आदमखोर होने का पुख्ता दावा किया। बाद में वन विभाग के परिसर में ही तेंदुए का शव जला दिया गया। तेंदुआ करीब आठ फीट लंबा और ढाई फीट ऊंचा था।
नदीगांव के आदमखोर को ढेर करने के साथ ही लखपत सिंह के खाते में 52 तेंदुओं का शिकार दर्ज हो चुका है। इससे पहले लखपत ने गरुड़ के हरिनगरी गांव के आदमखोर को मार कर अर्द्धशतक पूरा किया था। इसके बाद अल्मोड़ा के सोमेश्वर का आदमखोर उनका 51वां निशाना बना था। शनिवार को आदमखोर के मारे जाने की पुष्टि के साथ ही लखपत ने 52वां शिकार पूरा करने की उपलब्धि हासिल की। शौकिया शिकारी लखपत पेशे से शिक्षक हैं। उनका कहना है कि उन्हें वन्य जीवों को मारना अच्छा नहीं लगता, लेकिन मानव जीवन की रक्षा के लिए हथियार चलाते हैं। ब्यूरो
मुख्य नगर से सटे बिलौना और मेहनरबूंगा के बीच शनिवार दोपहर घास काट रही महिलाओं को तेंदुआ नजर आया। तेंदुआ सरयू नदी के एक डेल्टा पर पत्थर के टीले पर बैठा था। तेंदुआ भी महिलाओं को देख चुका था। खतरा भांपकर महिलाओं ने घास के गठ्ठर छोड़कर वापस घर की ओर दौड़ लगा दी। पूर्व प्रधान रमेश राज ने वन विभाग को सूचना दी। ब्यूरो
तेंदुए के हमले के घायल की सुध नहीं
चौरा में घायल तेंदुए के हमले में घायल हुए अधेड़ ने सुध न लेने का आरोप लगाया है। पीड़ित हल्द्वानी के राजकीय सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती है। घायल तेंदुए के हमले में अधेड़ जगदीश सिंह को 80 टांके आए थे। हालत गंभीर देखकर चिकित्सकों ने हायर सेंटर रेफर किया था। चौरा निवासी जगदीश के परिजनों का कहना है कि विभाग ने अभी तक सुध नहीं ली है। इलाज में कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है।