कोटद्वार की दुगड्डा नगर पालिका क्षेत्र में अफ्रीकन स्वाइन फीवर से अभी तक 10 पालतू सुअरों की मौत हो चुकी है जबकि अन्य कई पालतू सूअर संक्रमण की चपेट में हैं। पशुपालन विभाग की ओर से 15 संक्रमित सुअरों के सैंपल लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला में भेज दिए गए हैं।
हल्द्वानी में 15 दिनों के भीतर 25 सुअरों की मौत होने से पशुपालन विभाग में खलबली मच गई है। अफ्रीकन स्वाइन फीवर की आशंका को देखते हुए रुद्रपुर लैब से पशु चिकित्सकों की टीम हल्द्वानी पहुंची। टीम ने मंगलवार को गांधीनगर, काठगोदाम और राजपुरा क्षेत्र का दौरा किया और मृत सुअरों के सैंपल लिए।
टीम में शामिल डॉ. मीना चंद और डॉ. सुधा कृपाल ने बताया कि सैंपल जांच के लिए राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान भोपाल भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी की पुष्टि हो पाएगी। वहीं इससे पूर्व पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रजनीश पाठक ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जांच रिपोर्ट मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को भेज दी है।
अफ्रीकन स्वाइन फीवर अफ्रीकी देशों से आया है। यह एक वायरल बीमारी है। इस बीमारी में तेज बुखार के बाद दिमाग की नस फटने से सुअरों की मौत हो जाती है। इस रोग से सुअरों के बचने का प्रतिशत काफी कम होता है। यह रोग एक से दूसरे सुअर के संपर्क में आने से फैलता है। अगर संक्रमित सुअर ने कुछ खाकर छोड़ दिया और उसे दूसरे स्वस्थ सुअर खा ले तो यह रोग उसे भी हो जाता है। यह बीमारी सुअरों के लिए बेहद खतरनाक है। यह बीमारी जानवरों से इंसानों में नहीं फैलती है।
अफ्रीकन स्वाइन फीवर से बचाव के लिए कोई वैक्सीन या दवा नहीं है। इससे बचाव के लिए जानवरों को खुले में न छोड़ें। गोबर और मृत जानवरों को गड्ढे में दफनाएं। इसके अलावा ब्लीचिंग या डीडीटी का छिड़काव करें।
हल्द्वानी के गांधीनगर, काठगोदाम और राजपुरा क्षेत्र में बीते 15 दिन के भीतर 25 सुअरों की मौत हो गई हैं। रुद्रपुर लैब से डॉक्टरों की टीम ने मंगलवार को प्रभावित स्थलों का दौरा किया। मृत सुअरों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाएंगे।