उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की जा रही कई आयुर्वेदिक दवाओं के सैंपल में गड़बड़ियां सामने आई हैं।
सैंपलिंग में डेढ़ दर्जन से अधिक दवाएं मानकों के अनुकूल नहीं मिलीं हैं। इस वजह से इनकी गुणवत्ता सवालों में है। हालांकि, विभाग इसे केवल सैंपलिंग में गड़बड़ी का मामला मान रहा है। इसलिए इन दवाओं की जांच के लिए सैंपल पंजाब की प्रयोगशाला में भेजे हैं।
प्रदेश में आयुर्वेद एवं यूनानी सेवाएं जिन दवाओं की आपूर्ति कर रही है, इसमें से करीब 20 दवाओं में गड़बड़ी मिली है। 25 जुलाई को विभाग के असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर व ड्रग इंस्पेक्टर ने इन दवाओं के सैंपल लिए थे। ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के अनुसार इन दवाओं के मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाया गया है।
हालांकि, दवाई बनाने वाली फर्म इसे मानने को तैयार नहीं है। दवा फर्मों का कहना है कि उसी बैच नंबर और लॉट की दवाएं देश के अन्य राज्यों में भी भेजी गई हैं। वहां सैंपलिंग में किसी भी दवा में गड़बड़ नहीं मिली है।
क्या-क्या मिली गड़बड़ियां
- अधिकतर दवाओं में तत्वों (सॉल्ट) का प्रयोग मानकों के अनुसार नहीं। किसी में कम तो किसी में ज्यादा मिला सॉल्ट।
- एल्कोहल का प्रयोग भी मानक से कम और ज्यादा मिला।
- कई दवाओं का नाम भी ठीक नहीं लिखा।
- कई दवाओं पर बैच नंबर भी दर्ज नहीं।
- पैकेट पर दवा में शामिल अवयवों (कंपोजिशन) का विवरण नहीं।
- दवाओं में पीएच मानक से कम व ज्यादा मिला।
यह दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरी
- ऐलादी वटी
- चंद्रप्रभा वटी
- शंख वटी
- रजपवर्तनी वटी
- लवनगादी वटी
- सितोपलादी चूर्ण
- हरिद्राखंड
- प्रभाकर वटी
- लोहासव
- दशमूलारिष्ट
- चय्वनप्राश
- लक्ष्य गुग्गुलु
- लवण भास्कर चूर्ण
- योगराज गुग्गुलु
- हिंगवष्टक चूर्ण
- पुष्यानुग चूर्ण
- तालिसादी चूर्ण
- अविपतिकर चूर्ण
- सिलासुलाधीवज्र रस
- द्राक्षासव
इनकी दवा में गड़बड़ी
- श्री उत्तराखंड विद्यापीठ आयुर्वेदिक फार्मेसी, उखीमठ, रुद्रप्रयाग
- एमएफपी पीएआरसी बरखेड़ा पठानी, भोपाल, मध्य प्रदेश
- गोवा एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्यूटिकल लिमिटेड, गोवा
- कर्नाटका एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्यूटिकल लिमिटेड, बंगलुरु
सप्लाई के समय सभी दवाओं के सैंपल ठीक पाए गए थे, जिसकी रिपोर्ट हमारे पास है। रेंडम सैंपलिंग में गड़बड़ी सामने आई है, जिसके बाद सैंपल थर्ड पार्टी जांच के लिए पंजाब की लैब में भेजे गए हैं। पंजाब से रिपोर्ट मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
- प्रो. (डॉ.) अरुण कुमार त्रिपाठी, निदेशक, आयुर्वेद एवं यूनानी सेवाएं