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ND तिवारी के जन्मदिन पर अखिलेश यादव ने 'गिफ्ट' की सड़क

Mon, 19 Oct 2015 01:06 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के 90वें जन्मदिन पर बर्थडे गिफ्ट के तौर पर यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यूपी को उत्तराखंड के करीब लाने वाली एक सड़क उनके नाम कर दी।
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वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत इस कार्यक्रम में करीब 40 मिनट रहे और तिवारी जी की उपलब्धियों का बखान कर पैगाम देकर चले गए। एनडी के नाम से जानी जाने वाली 54 किमी बरेली बागेश्वर सड़क 540 करोड़ की लागत से बनाई गई है।

उल्लेखनीय है कि रविवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बरेली में बहेड़ी तक की इस सड़क का लोकार्पण किया। एनडी के जन्मदिन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे उत्तराखंड सीएम हरीश रावत ने कहा कि एनडी तिवारी 90 नॉट आउट हैं, उनकी हार्दिक इच्छा है कि न सिर्फ सेंचुरी बनाए बल्कि और ज्यादा जीएं।
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उनका व्यक्तित्व इतना ऊंचा है कि बड़ा से बड़ा व्यक्ति बौना नजर आता है। आर्थिकता और विकास के मामलों में उनका योगदान महत्वपूर्ण है। हरीश रावत ने कहा कि बड़े भाई का दायित्व बनता है कि वह छोटे भाई को आगे बढ़ने में मदद करे। यूपी के सीएम अखिलेश यादव भले ही उम्र में छोटे हैं, लेकिन बड़े भाई का दर्जा बड़ा ही होता जो भी परिसंपत्ति का बंटवारा है, वह बड़े-छोटे भाई मिलकर सुलटा लेंगे। वैसे भी गंगा ने दोनों प्रदेशों को जोड़ा हुआ है।

हरीश रावत के जाने के करीब सवा घंटे बाद दोपहर 2:40 पर पहुंचे सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि इस लोकार्पण कार्यक्रम का दिन विशेषकर एनडी तिवारी के जन्मदिन के लिए ही चुना गया। बरेली-बागेश्वर मार्ग उनके नाम से जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सड़क दोनों राज्यों को जोड़ती है।

इस सड़क से दोनों राज्यों के लोगों का फायदा होगा, वाहनों की रफ्तार बढ़ेगी। अखिलेश ने कहा कि एनडी तिवारी समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष हैं। पूर्व सीएम के कारण ही दोनों राज्यों के रिश्ते और मजबूत होंगे। उत्तराखंड राज्य की मदद के लिए यूपी हमेशा तैयार है, इसके लिए नियम की परिधि से भी आगे निकलकर मदद की जाएगी।

अखिलेश यादव ने कहा कि बस संचालन, मेडिकल कॉलेज में पीजी सीट का मामला सामने आया था। इस पर उत्तराखंड सीएम ने फोन किया था। अखिलेश ने बताया कि तब उन्होंने कहा था कि जनता कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए, वह किसी भी बस से यात्रा करें।

उत्तराखंड के लोगों की यूपी में मेडिकल कॉलेज में पीजी सीट के लिए व्यवस्था पूर्व की तरह ही रहने अखिलेश यादव ने आश्वासन दिया। बाद में उन्होंने मंच पर एनडी तिवारी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इससे पूर्व एनडी तिवारी को सीएम ने शाल ओढ़ाकर जन्मदिन की शुभकामना दी।
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कहीं सड़क के रास्ते घुसने की तैयारी तो नहीं

अमरनाथ/ अमर उजाला, हल्द्वानी

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी का 90वां जन्मदिन मनाने यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में यहां पहली बार आए अखिलेश यादव बरेली-बागेश्वर मार्ग के नाम का ऐलान और अलग अंदाज में खुद के काम करने के तरीके को गिनाकर सपा की ‘जमीन’ तैयार कर गए।

ऐसा कर कहीं सड़क के रास्ते उत्तराखंड में सपा के घुसने की तैयारी तो नहीं है। चंद मिनटों के भाषण में अखिलेश ने एक तरफ यूपी और उत्तराखंड के तमाम मसलों पर हर संभव सहयोग करने की बात कहकर तालियां बटोरीं तो दूसरी तरफ इसी मंच से अपने नेताओं को नसीहत भी दे दी।

अखिलेश इस सड़क के उद्घाटन के मौके पर बरेली में भी मार्ग का नामकरण कर सकते थे, लेकिन उन्होंने इस बड़े मौके को हाथ से जाने नहीं दिया। कांग्रेस के गढ़ में संपर्क मार्ग एनडी के नाम करने की घोषणा कर यहां की जनता को उन्होंने विकास पुरुष एनडी तिवारी और रोहित शेखर के करीबी होने का संदेश देने की कोशिश भी की।

इस दौरान उनका यह भी प्रयास रहा कि पुराने दिनों की कड़वी यादें भुलाई जाएं और दोनों प्रदेशों के बीच दूरियां कम हों। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास से कहा कि यूपी में जब तक उनकी यानी समाजवादी पार्टी की सरकार है, तब तक उत्तराखंड-यूपी के बीच के हर उलझे मसले को सुलझाने में हर संभव सहयोग करेंगे।

कहा तो जा रहा था कि यह गैर राजनीतिक कार्यक्रम है, लेकिन अखिलेश अपने उत्तराखंड से जुड़े चुनिंदा निर्णयों को गिनाकर उपस्थित जनसमूह को यह बताते में कामयाब रहे कि उनके काम करने का अंदाज अलग है। चाहे रोडवेज बस का विवाद हो या मेडिकल कॉलेज में पीजी सीटों को मामला। अपने त्वरित फैसलों को गिनाकर अखिलेश ने यह संदेश दिया कि नेताजी (मुलायम सिंह) ही नहीं, उनकी सोच भी समरसवादी है और उनकी सरकार उत्तराखंड के लोगों के दुखों को बांटने में हर संभव सहयोग कर रही है।

भाषण के अंत में अखिलेश अपने नेताओं को नसीहत भी दे गए। प्रेम प्रकाश का नाम लेते हुए कहा कि एक समय वह हल्द्वानी से हार गए और बिहार बॉर्डर से सपा के टिकट पर जीत गए। अब उन्हें ही तय कर करना है कि आगे वह कहां से लड़ेंगे। उनके कहने का मतलब साफ था कि यदि उन जैसे नेताओं को उत्तराखंड से लड़ना है तो पहले सियासी जमीन तैयार करनी होगी।
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