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अपर सचिव पर लटक रही एक और तलवार

Wed, 04 Dec 2013 01:52 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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अपर सचिव जेपी जोशी की गिरफ्तारी के बाद अब सरकार के सामने भी विवशता होगी। उत्तराखंड सरकारी सेवक अनुशासन व अपील नियमावली 2003 के तहत पुलिस रिमांड में 48 घंटे पूरे होने के बाद अपर सचिव जोशी को सस्पेंड करना ही पड़ेगा।
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हालांकि, शासन स्तर पर इसकी तैयारी की जा रही है। सरकारी अफसरों व कार्मिकों के लिए यह प्रावधान है कि यदि वे किसी भी मामले में 48 घंटे तक जेल में या पुलिस रिमांड में रहते हैं तो उन्हें सस्पेंड मान लिया जाएगा, शासन से होने वाला आदेश औपचारिकता भर होगा। अब जोशी का सस्पेंड होना भी तय है।

जिन पर थी हनक, उसी ने किया गिरफ्तार
जेपी जोशी का छह साल से भी ज्यादा समय गृह विभाग में गुजरा। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि महकमे में उनकी हनक थी।

पुलिस विभाग में निचले स्तर से लेकर पीएचक्यू तक में जोशी का खासा रसूख था।लेकिन इसे संयोग ही कहा जाएगा कि जिस पुलिस के बीच जोशी का जलवा कायम था उसी ने गिरफ्तार कर लिया।
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पिछले दरवाजे से पेश किया
पुलिस ने जेपी जोशी को अदालत में पिछले दरवाजे से पेश किया। उसकी कोशिश थी कि जोशी मीडिया के सामने न आ पाएं।

हालांकि, जोशी की गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही अदालत परिसर में मीडिया कर्मियों का जमावड़ा लग गया था, लेकिन पुलिस की सतर्कता की वजह से जोशी का आमना-सामान मीडिया से नहीं हो पाया।

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पुलिस शाम करीब सवा छह बजे जिप्सी में जोशी को लेकर अदालत में पहुंची। यहां जोशी के वकील ने उनकी जमानत के लिए कई तरह के तर्क प्रस्तुत किए, जिसे खारिज करते हुए अदालत ने जोशी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

गिरफ्तारी सियासी साजिश
बचाव पक्ष के वकील चंद्रशेखर तिवारी ने जोशी की गिरफ्तारी को गलत ठहराते हुए इसे राजनीतिक साजिश और ब्लैकमेलिंग का मामला बताया। कहा कि जोशी को पदोन्नत करने, छवि धूमिल करने और धन ऐंठने जैसे धमकियां मिल रही थीं।

जिस पर उन्होंने युवती और एक इलेक्ट्रॉनिक चैनल के दो प्रतिनिधियों पर वसंत विहार थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। दावा किया कि उनके मुकदमे की जानकारी होने के बाद ही साजिशकर्ताओं ने युवती की ओर से गुपचुप तरीके से दिल्ली में जीरो एफआईआर करा दी।

यह भी दिए तर्क
जोशी की जमानत कराने के लिए उनके वकील ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि चूंकि जोशी शासन में उच्च पद पर हैं ऐसे में उनकी गिरफ्तारी से पहले मुख्य सचिव से अनुमति लेनी चाहिए थी जोकि नहीं ली गई है। उनकी गिरफ्तारी घर से की गई।

यह भी कहा कि मीडिया ट्रायल होने और दबाव के चलते गिरफ्तारी हुई है। बचाव पक्ष ने अंतरिम जमानत के पक्ष में हाईकोर्ट के निर्णयों का हवाला भी दिया। तर्क दिया कि जोशी हृदय, स्लिप डिस्क और घुटने की बीमारी से पीड़ित हैं।

घटनास्थल कहीं और बताया गया है जबकि मुकदमा कहीं और दर्ज किया गया है। जोशी दो नवंबर से छुट्टी पर हैं। वे अधिकारी हैं, उनसे मिलने कई लोग आते हैं। ऐसे में कोई किसी पर विश्वास नहीं करेगा।

जेलर को जांच के निर्देश
अंतरिम जमानत रद्द होने के बाद बचाव पक्ष ने जोशी को विशेष मेडिकल सुविधा की मांग की। इसके लिए अधिवक्ता ने डाक्टर के पर्चे भी दाखिल किए।

जोशी को दून अस्पताल में भर्ती कराने की इजाजत भी मांगी। अदालत ने इस पर जेलर को निर्देश दिए कि जेल मैनुअल के तहत जेल में मेडिकल और जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

काउंटर एफआईआर पर जांच
डीजीपी ने बताया कि जोशी की एफआईआर पर महिला के खिलाफ विवेचना चल रही है। यौन उत्पीड़न मामले में डीजीपी ने विगत 24 नवंबर को पुलिस मुख्यालय की निगरानी में एडिशनल एसपी ममता बोरा के नेतृत्व में जांच टीम का गठन किया था।

अब खतरा और बढ़ा : पीड़िता
जेपी जोशी की गिरफ्तारी होने से मैं खुश हूं। लेकिन मुझे अब खतरा और बढ़ गया है। मैं सुरक्षा चाहती हूं। अंदेशा है कि पुलिस अब अपर सचिव की ओर से दर्ज मुकदमे के बहाने मुझे परेशान करेगी। खुद को न्याय के लिए मैं अंतिम क्षण तक लड़ाई लड़ूंगी।

सच्चाई की जीत
यह क्लीन चिट नहीं बल्कि सच्चाई की जीत है। मैं अपने शुभचिंतकों, पार्टी के लोगों का आभार जताती हूं, जिन्होंने मेरा साथ दिया और मुझ पर विश्वास किया। यही वजह है कि आज मैं सुकून महसूस कर रही हूं।
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- रितु कंडियाल, कांग्रेस नेता
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