उत्तराखंड में 2050 तक ऊर्जा की जरूरतों और उससे निपटने के लिए एक एक्शन प्लान तैयार हो रहा है। इसके लिए सभी ऊर्जा खपत से जुड़े विभागों के अधिकारियों की कार्यशाला हुई। जीआईजेड ने इसके लिए यूपीईएस और सेलेस्टियल अर्थ संस्था को सलाहकार नामित किया हुआ है।
उत्तराखंड की ऊर्जा जरूरतों को लेकर 30 साल का एक्शन प्लान बनेगा। इसके लिए उत्तराखंड सरकार और जर्मन सरकार के बीच एमओयू साइन हुआ है। इसके तहत शुक्रवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया। जर्मन सरकार की संस्था जीआईजेड और उत्तराखंड सरकार के बीच यह समझौता नीति आयोग के निर्देशों के तहत हुआ है। इसके लिए उरेडा को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
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उरेडा के चीफ प्रोजेक्ट ऑफिसर नीरज गर्ग ने बताया कि इस समझौते के तहत उत्तराखंड में 2050 तक ऊर्जा की जरूरतों और उससे निपटने के लिए एक एक्शन प्लान तैयार हो रहा है। इसके लिए शुक्रवार को सुभाष रोड स्थित होटल में आयोजित कार्यशाला में सभी ऊर्जा खपत से जुड़े विभागों के अधिकारियों की कार्यशाला हुई।
उनसे वर्तमान ऊर्जा खपत और भविष्य की संभावनाओं को लेकर जानकारी ली गई है। जीआईजेड ने इसके लिए यूपीईएस और सेलेस्टियल अर्थ संस्था को सलाहकार नामित किया हुआ है। सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम ने भी इसके लिए इस साल के अंत तक एक एक्शन प्लान तैयार करने को कहा है। इनमें से कुछ प्लान को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाएगा। उसके परिणाम के आधार पर प्रदेशभर में इसे लागू किया जाएगा।