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Dehradun News: भाई और बहन को अवैध तरीके से ट्रस्ट से बाहर निकालने का आरोप

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Iकैंब्रियन हॉल एजुकेशनल ट्रस्ट के अध्यक्ष कृष्णा एसजेबी राणा के खिलाफ उनकी बहन अमृता सिंह ने धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप है कि कृष्णा एसजेबी राणा ने उन्हें और उनके बड़े भाई ऋषि शमशेर सिंह राणा को अवैध तरीके से ट्रस्ट की आजीवन सदस्यता से हटा दिया। इनके स्थान पर अपनी पत्नी को स्थाई सदस्य नियुक्त कर दिया। जबकि, वह उनकी माता की कानूनन उत्तराधिकारी नहीं हैं। इसके लिए कृष्णा राणा पर कई दस्तावेज में फर्जीवाड़े का आरोप भी लगा है।
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Iशहर कोतवाल चंद्रभान सिंह अधिकारी ने बताया कि मामले में अमृता सिंह ने शिकायत की है। उन्होंने पुलिस को बताया है कि कैंब्रियन हॉल एजुकेशनल ट्रस्ट कैंब्रियन हॉल स्कूल संचालित करता है। यह जिस स्थान पर बना है वह भूमि रक्षा मंत्रालय की थी, जिसे उनके दादा राजा एसजेबी राणा को 99 साल की लीज पर बनी थी। दादा की मृत्यु के बाद उनके पिता और फिर उनकी माता रानी चंद्रराज लक्ष्मी इस ट्रस्ट की अध्यक्ष बनीं। उनकी मृत्यु के बाद ट्रस्ट के अध्यक्ष कृष्णा राणा बनाए गए। अमृता सिंह इस ट्रस्ट की आजीवन सदस्य थीं। लेकिन, उन्हें कृष्ण राणा ने इस पद से हटा दिया। इसकी उन्होंने सोसाइटी रजिस्ट्रार कार्यालय में भी शिकायत की लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि यह सब इस ट्रस्ट की संपत्तियों और धन को हड़पने के लिए किया गया है।
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Iअमृता सिंह का कहना है कि कृष्णा ने वर्ष 2009 के एक आदेश पत्र पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए और इसका उपयोग 2023 में सोसाइटी रजिस्ट्रार कार्यालय में किया। इसकी शिकायत उन्होंने मार्च में राजपुर पुलिस को भी की थी लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। आरोप यह भी है कि वर्तमान में स्कूल बिना लीज नवीनीकरण के संचालित हो रहा है। अमृता सिंह ने कृष्णा राणा पर और भी आरोप लगाए हैं। उन्होंने पुलिस को बताया है कि कृष्णा राणा ने नेपाली फार्म स्थित ट्रस्ट की भूमि को जाली पॉवर ऑफ अटॉर्नी बनाकर बेच डाला। एसआईटी ने उन्हें दोषी पाया और न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी। हाईकोर्ट से भी इस मामले में कृष्णा राणा की जमानत दो बार खारिज हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह लगातार ऋषिकेश न्यायालय में पेशी पर जा रहे हैं। यही नहीं एक और संपत्ति को कृष्णा राणा ने अमृता सिंह के जाली हस्ताक्षर कर बेच दिया। इसकी शिकायत पर भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।I
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