जांच में ये तथ्य आए सामने
-सेलाकुई लाइन में एक साल में 141 बार फॉल्ट आए। इससे वैक्यूम सर्किट ब्रेकर(वीसीबी) फेल हो सकता था।
-फॉल्ट के दौरान बैटरी बैंक ने प्रोटेक्शन सिस्टम को डीसी सप्लाई नहीं दी। ये सिद्ध हुआ कि दोनों बैटरी बैंक डिफेक्टिव कंडीशन में थे।
-सब स्टेशन में स्काडा का सिस्टम प्रॉपर काम नहीं कर रहा था। इसमें फॉल्ट या लाइन की खराबी का कोई रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं मिला।
-वीएमएस स्काडा और रिले डाटा का रखरखाव भी नहीं किया गया था। डीसी चार्जर, डीसी अर्थ फॉल्ट, डीसी सुपरविजन और अन्य क्रिटिकल अलार्म की रिपोर्टिंग भी स्काडा में नहीं पाई गई।
-33 केवी सिस्टम में चंद्र सेकेंड के जाए तीन मिनट तक शॉर्ट सर्किट रहा, जिससे बड़ा नुकसान हुआ। चार सर्किट ब्रेकर, पोस्ट इंसूलेटर, सीटी आदि उपकरण फूंक गए।
-सब स्टेशन में रखा डीजल जनरेटर वैसे तो ठीक था लेकिन ऑटो के बजाए मैन्युअल मोड में काम कर रहा था।
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पीजीसीआईएल के सुझाव की कार्ययोजना बनाएगा पिटकुल
पावर ग्रिड ने सब स्टेशन के रखरखाव व सुरक्षा तंत्र को और मजबूत बनाने के लिए जो सुझाव दिए हैं, उस पर शासन ने पिटकुल को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पिटकुल के एमडी पीसी ध्यानी ने चीफ इंजीनियर गढ़वाल को पत्र भेजकर पावरग्रिड के सुझावों के तहत कार्ययोजना बनाने को कहा है। यह कार्ययोजना सात नवंबर को सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम की बैठक में पेश की जाएगी।