देहरादून के बेटे अभिलाष सेमवाल ने तकनीक की दुनिया में एक नई इबारत लिखी है।
अभिलाष की बम डिटेक्टर डिवाइस को अफ्रीका में हुई ग्लोबल समिट के बाद दुनिया में पहला स्थान मिला है। अफ्रीका की रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनी ने उन्हें इस डिवाइस को तैयार करने के लिए बुलावा भेजा है।
उत्तराखंड के कर्णप्रयाग निवासी ग्राफिक एरा पर्वतीय विवि के बीटेक कंप्यूटर साइंस के छात्र अभिलाष की मोबाइल बम डिटेक्टर डिवाइस आईआईटी खड़गपुर जाते ही छा गई थी। आईआईटी में विशेषज्ञों ने खूब सराहना की। यहां हुए ‘ग्लोबल इंटरप्रेन्योरशिप समिट’ में अभिलाष की इस डिवाइस को दुनियाभर में तीसरी रैंक मिली।
इसके बाद दिसबंर, 2014 में अफ्रीका में अभिलाष की मोबाइल बम डिटेक्टर डिवाइस को व्यवहारिक तौर पर चेक किया गया। अफ्रीका की रक्षा उपकरणों की कंपनी ने इसे पहली रैंक दी है। वहां से परिणाम के साथ अभिलाष को प्रशस्ति पत्र भेजा गया है।
ऐसे काम करती है बम डिटेक्टर डिवाइस
अब अभिलाष को अफ्रीका बुलाया जा रहा है, ताकि वहां से दुनिया भर में इस डिवाइस को डेवलप करके भेजा जा सके। इससे पूर्व आईआईटी खड़गपुर की इंटरप्रेन्योरशिप सेल की ओर से 10 से 12 जनवरी 2014 के बीच ‘ग्लोबल इंटरप्रेन्योरशिप समिट’ का आयोजन किया गया था।
इसमें दुनिया की शीर्ष 20 टीमों ने प्रतिभाग किया था। ग्लोबल समिट के लिए अभिलाष को दुनिया की शीर्ष-20 टीमों में से सातवां स्थान मिला था।
कार में लगा सेंसर चेसिस नंबर की सहायता से मोबाइल से कनेक्ट होता है। यह सेंसर अपने आसपास किरणें छोड़ता है। बम में मौजूद गैसें जैसे ही इन किरणों से टकराती हैं सेंसर को तुरंत इसकी जानकारी मिल जाती है।
सेंसर इसका अलर्ट संबंधित मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से भेज देता है। इस तकनीक से कार में बम के इस्तेमाल का काफी हद तक पता चल जाएगा।
आपदा से पार पाने के लिए काम कर रहे हैं अभिलाष
बम डिटेक्टर डिवाइस बनाने पर उत्तराखंड सरकार ने अभिलाष को पांच लाख का पुरस्कार दिया था। इसके बाद 25 लाख रुपए का एक प्रोजेक्ट उन्हें दिया गया है। अभिलाष अब इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, जिससे आपदा के वक्त तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को बचाया जा सके।
मेक इन इंडिया के भी दावेदार
अभिलाष का यह प्रोजेक्ट अब मेक इन इंडिया का भी हिस्सा बन सकता है। ग्राफिक एरा पर्वतीय विवि की ओर से अभिलाष की मोबाइल बम डिटेक्टर डिवाइस को मेक इन इंडिया के लिए भेजा गया था।
जानकारी के मुताबिक, अभिलाष का प्रोजेक्ट दौड़ में आगे चल रहा है। उम्मीद है जल्द ही यहां भी उनका प्रोजेक्ट चयनित हो जाएगा।
आप भी सपनों को बना सकते हैं हकीकत
अगर आप इंजीनियरिंग के छात्र हैं। आपके दिमाग में भी नए आइडिया आते हैं और आप कोई प्रोजेक्ट बनाना चाहते हैं तो आईआईटी खड़गपुर आपके लिए बेहतर मंच हो सकता है। आपको आईआईटी की वेबसाइट पर अपना पंजीकरण कराना होता है। इससे सभी गतिविधियों की सूचना आपको ईमेल से मिलती रहेंगी।
इसके बाद हर तीन साल में होने वाले ग्लोबल समिट के लिए अपना प्रोजेक्ट आइडिया ईमेल के माध्यम से आईआईटी को भेजें। विशेषज्ञों को आपका आइडिया यूनीक लगा तो आपको कॉल करके बुलाएंगे। वहां आईआईटी की ओर से एक विशेषज्ञ आपके प्रोजेक्ट की कमियां दूर करवाकर आगे बढ़ने में मदद करेगा।
इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक तीन वर्षीय प्रतियोगिता आईआईटी खड़गपुर में होगी। यहां से आपको अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जाने का मौका मिल सकता है।