आम आदमी पार्टी (आप) ने उत्तराखंड सरकार और विदेशी कंपनियों के निवेश संबंधी समझौते को धोखा करार दिया है। साथ ही स्मार्ट सिटी पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। वरिष्ठ आप नेता अनूप नौटियाल ने मुख्यमंत्री को स्मार्ट सिटी पर एमडीडीए की भूमिका पर खुली बहस की चुनौती दी।
राजपुर रोड स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में आप के वरिष्ठ नेता अनूप नौटियाल ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल ऑयल कारपोरेशन व हांगकांग की नोवॉम लिमिटेड द्वारा कुल 3300 करोड़ रुपए की विदेशी निवेश संबंधी घोषणा धोखा व भ्रष्टाचार का नमूना है। उन्होंने कहा कि ये दोनों कंपनियां कहीं अस्तित्व में नहीं हैं।
इनकी कोई वेबसाइट नहीं है। इनके स्वामित्व का स्वरूप कैसा है, इनके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स इत्यादि कौन हैं, इसका किसी को पता नहीं है। अगर ये कंपनियां इतना निवेश कर रही हैं तो इनकी वित्तीय हैसियत बड़ी होनी चाहिए थी। नौटियाल ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में जानकारी हासिल करने की बहुत कोशिश की, लेकिन कंपनियों का कोई ब्यौरा नहीं मिला।
अनूप नौटियाल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और उनके नौकरशाह काले धन को सफेद में परिवर्तित करने के लिए ये रास्ते अख्तियार कर रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्रालय से इसकी जांच करने की मांग की। नौटियाल ने कहा कि स्मार्ट सिटी के लिए केंद्र सरकार ने कई विकल्प दिए थे। लेकिन राज्य सरकार चाय बागान पर ही स्मार्ट सिटी बनाने की हठ में है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे बड़ा भ्रष्टाचार छिपा है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह स्मार्ट सिटी के सभी यामों पर श्वेतपत्र जारी करे। इस मौकेपर रणबीर चौधरी, ओंकार भाटिया, कमल देवराड़ी आदि उपस्थित थे।
एमडीडीए है अनियोजित विकास को जिम्मेदार : नौटियाल
आप नेता अनूप नौटियाल ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के उपाध्यक्ष आर मीनाक्षी सुंदरम के उस बयान को विरोधाभासी व शर्मनाक करार दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि बासमती चावल का उत्पादान करने वाली जमीनों में अनियोजित विकास हुआ।
नौटियाल ने कहा कि एमडीडीए रेगुलेटरी व मॉनिटरिंग बॉडी है। पिछले पंद्रह वर्ष में एमडीडीए की भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए। अगर अनियोजित विकास हुआ है तो उसके लिए एमडीडीए ही जिम्मेदार है। साथ ही वे नाम भी सार्वजनिक होने चाहिए जो चाय बागान में अतिक्रमण कर रहे हैं।
जुगरान ने चीनी विवि से टेंडर पर उठाए सवाल
राज्य युवा कल्याण परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष रविंद्र जुगरान ने स्मार्ट सिटी के कई कार्यों के लिए चीनी विश्वविद्यालय से करार पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि चाइना के विश्वविद्यालय से ई टेंडर या ग्लोबल टेंडर जारी किए बगैर किस आधार पर एमओयू साइन किए गए। जुगरान ने कहा कि दून घाटी के मास्टर प्लान को लागू किए बगैर स्मार्ट नहीं बनाई जा सकती है। चाय बागान के मामले में जनता को गुमराह कर रही है।
निरस्त हो निगम का स्मार्ट सिटी प्रस्ताव
जिला पंचायत सदस्य सेवलां कला सविता चौहान ने स्मार्ट सिटी के लिए नगर निगम के प्रस्ताव को निरस्त कर इसे जिला पंचायत से पास कराने की मांग की है। पंचायत प्रतिनिधियों ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करार दिया है।
रविवार को राज्यपाल को भेजे ज्ञापन में सविता चौहान सहित क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधियों ने कहा कि स्मार्ट सिटी से होने वाली आय में 50 प्रतिशत लाभांश नगर निगम को मिलेगा। लेकिन यह चाय बागान ग्रामीण क्षेत्र में है। प्रस्तावित स्मार्ट सिटी के स्थान पर निगम का कोई अधिकार नहीं है।
लेकिन इस तरह के प्रस्ताव पास कर निगम जिला पंचायत के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रहा है। ज्ञापन देने वालों में सांसद प्रतिनिधि रतन सिंह चौहान, नीरज सिंघल, पूर्व प्रधान मनोहर लाल, महेश कुमार, राकेश कुमार, अमर सिंह, घनश्याम, प्रदीप, अरुण कुमार, उर्मिला देवी, पदमा देवी, सीमा देवी, रंजना देवी, राधा, राजकुमार, महेंद्र, अवधेश चौहान आदि शामिल रहे।
‘स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव गलत’
सांसद प्रतिनिधि नीरज सिंघल ने कहा कि स्मार्ट सिटी के लिए राज्य सरकार एवं नगर निगम द्वारा जो प्रस्ताव पास किया गया है वह गलत है। यह स्थान ग्रामीण क्षेत्र में आता है, नगर निगम से इसकी डीपीआर का प्रस्ताव पास नहीं कराया जा सकता।