पौष माह में बंद रहने के बाद मकर संक्रांति के पावन पर्व पर श्री आदिबदरी नाथ के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए। इस मौके पर मंदिर परिसर में नौ दिवसीय महाभिषेक समारोह और श्रीमद् देवी भागवत पुराण भी शुरू हुआ।
मंत्रोच्चार के साथ खुले कपाट
मंगलवार को वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान के साथ ब्रह्म मुर्हूत में प्रात: 4.30 बजे मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शनार्थ खोले गए। मुख्य पुजारी चक्रधर थपलियाल और प्रेम बल्लभ थपलियाल ने मंदिर के गर्भ गृह में भगवान श्री आदिबदरी नाथ की पूजा-अर्चना शुरू की।
सुगंधित मिश्रित और सप्त सिंधु जल से स्नान के बाद भिगवान को चंदन, रोली का टीके के साथ ही पीतांबर वस्त्र के साथ सोने-चांदी के आभूषणों से अलंकृत किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर ढोल, दमाऊं, घंटे घंडियाल की गूंज से गुंजायमान रहा। इस दौरान मंदिर समूह के सभी मंदिरों के कपाट भी विधि-विधान के साथ खोले गए।
आदिबदरी बने बारामासी पर्यटन : नेगी
मंगलवार को गैरसैंण के एसडीएम केएस नेगी ने गढ़वाल रायफल कीर्तन मंडप में नौ दिवसीय महाभिषेक समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने धाम को बारामासी पर्यटन के रूप में विकसित करने की जरूरत बताई।
मुख्य अतिथि ने व्यास सुनील खंडूड़ी को उत्तरी वस्त्र ओढ़ाकर गद्दी पर विराजमान किया। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष बृजयेश नवानी ने कहा कि राज्य निर्माण के इन 13 वर्षों में भी मंदिर के प्रति सरकारों की उपेक्षा कम नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि मंदिर के विकास के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। इस मौके पर समिति के महासचिव गैणा सिंह रावत, कोषाध्यक्ष नरेंद्र बरमोला, नरेंद्र सिंह चाकर, विनोद नेगी, नंदा सिंह पंवार, बलवंत नेगी, विजय चमोला आदि मौजूद थे।
देवी से ही सृष्टि की रचना
मंदिर परिसर में देवी भागवत कथा यज्ञ में कथा वाचक आचार्य सुनील खंडूड़ी ने कहा कि देवी भागवत पांचवा पुराण है। देवी से ही समस्त सृष्टि की रचना हुई है और संपूर्ण सृष्टि देवीमय है।