बच्ची ऑपरेशन से जन्मी। रिखाड़ी ने बताया कि वह भी नगर पालिका में आधार कार्ड बनवाते हैं, इसलिए बच्ची के जन्म होते ही इसकी जानकारी आधार टीम को दे दी थी, जिन्होंने अस्पताल पहुंचकर आधार कार्ड बनवाने की औपचारिकता पूरी की। इसमें बच्ची का नाम अवंतिका रिखाड़ी दर्ज किया गया है।
एक साल से कम उम्र के बच्चों का भी आधार कार्ड बन सकता है लेकिन यह अभिभावकों के कार्ड से लिंक होता है। पांच साल की उम्र होने पर बच्चे को बायोमैट्रिक रिकॉर्ड यानी फिंगर प्रिंट उसके कार्ड से लिंक किए जाते हैं। इसमें भी 15 वर्ष की उम्र तक बदलाव हो जाता है। ऐसे में 15 वर्ष की उम्र होने पर इन्हें दोबारा लिंक किया जाता है।