दशहरा (विजयादशमी) पर्व को लेकर विकासनगर और आसपास के क्षेत्रों में तैयारियां जोरों पर हैं। विभिन्न रामलीला समितियों की ओर से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले तैयार कराने का काम अंतिम चरण में है। इस बार सबसे ऊंचा 60 फुट का रावण हरबर्टपुर में जलेगा, जबकि डाकपत्थर में 55 और विकासनगर में 45 फुट के पुतले का दहन होगा। खास बात यह है कि बुराई के प्रतीक इन पुतलों को मुस्लिम कारीगर अपने हाथों से तैयार कर हिंदू-मुस्लिम समाज में आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की शानदार मिसाल पेश कर रहे हैं।
क्षेत्र में सबसे ऊंचे पुतले दशहरा कमेटी हरबर्टपुर की ओर से बनवाए जा रहे हैं। यहां 60 फुट ऊंचे रावण के साथ ही 40-40 फुट ऊंचे कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले तैयार किए जा रहे हैं, जिन पर करीब डेढ़ लाख रुपये की लागत आ रही है। वहीं, रामलीला समिति नेहरू मार्केट डाकपत्थर की ओर से 80 हजार रुपये की लागत से 55 फुट ऊंचा और विकासनगर की सरस्वती कला मंच समिति की ओर से 65 हजार रुपये की लागत से रावण का 45 फुट ऊंचा पुतला बनवाया जा रहा है। दशहरे के दिन विधिविधान से इन सभी पुतलों का दहन किया जाएगा।
तीन पीढ़ियों से पुतले बना रहा शामली का इरफान परिवार
दशहरा पर्व के लिए विकासनगर, डाकपत्थर और हरबर्टपुर में पुतले तैयार करने का काम उत्तर प्रदेश के शामली जिले (थाना भवन) के निवासी मोहम्मद इरफान और उनके कारीगर कर रहे हैं। मोहम्मद इरफान का परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से रावण के पुतले बनाने के काम से जुड़ा हुआ है। उनकी इस कला की मांग केवल उत्तराखंड में ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा समेत कई अन्य राज्यों में भी है। वर्तमान में पुतलों को अंतिम रूप देने के लिए इरफान के साथ नोशाद, चांद, सरफराज समेत अन्य कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। हिंदू समाज के इतने बड़े त्योहार में मुस्लिम कारीगरों की यह मेहनत समाज में आपसी भाईचारे और एकता का एक बेहद सकारात्मक संदेश दे रही है।