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कथा में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का लिया संकल्प

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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साल 1994 में राज्य निर्माण के लिए शहीद हुए आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के संकल्प के साथ समापन हुआ। नेहरू कॉलोनी स्थित सनातन धर्म मंदिर में सात दिन तक चली श्रीमद्भागवत कथा में शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही विभिन्न भजनों की प्रस्तुति भी दी गई।
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राज्य आंदोलन के 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर बाल विकास शिक्षा समिति, बेटी अधिकार मिशन, देवभूमि सिविल सोसायटी, उत्तराखंड न्याय मंच और संक्रांति सोसायटी की ओर से आयोजित कथा के अंतिम दिन कथावाचक आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का दिलाया। उन्होंने कहा कि बेटी ही परिवार और रिश्तों को बनाती है। बेटियों और महिलाओं पर बढ़ते अपराध पर ममगाईं ने कहा कि नारी का अपमान करने वालों को भगवान क्षमा नहीं करते। उन्होंने कहा कि रावण ने सीता का हरण किया, तो उसका पूरा परिवार नष्ट हो गया। वहीं, दुर्योधन ने द्रौपदी के चीर हरण का प्रयास किया, तो कौरवों का सब कुछ नष्ट हो गया। इस मौके पर भजन मंडली ने विभिन्न भजनों की प्रस्तुति से माहौल भक्तिमय कर दिया। इस दौरान मंत्री प्रसाद नैथानी, ज्योति सिंह बिष्ट, हीरा सिंह बिष्ट, चंद्रशेखर भट्ट, जय प्रकाश बडोनी, राज्य आंदोलनकारी सुशीला बलूनी, डॉ. राकेश सेमवाल, उत्तम सिंह पुरषोडा, गब्बर सिंह बंगारी आदि मौजूद रहे।
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