फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यहां मिला 900 साल पुराना शिव मंदिर, खुदाई के बाद दिखा अद्भुत नजारा

Tue, 22 Aug 2017 05:28 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
1 of 6
900 yearl old temple
भगवान श‌िव के कई मंद‌िर भारत में हैं। लेक‌िन यहां पर 900 साल पुराना श‌िव मंद‌िर म‌िला है। श‌िव मंद‌िर को देखकर सभी हैरान हैं। आगे जान‌िए मंद‌िर के बारे में अहम बातें...
विज्ञापन

80 से अधिक धरोहरें भगवान भरोसे

2 of 6
900 yearl old temple
यह मंद‌िर हाल ही में अल्मोड़ा जिले का चौखुटिया में खुदाई के दौरान म‌‌िला था। लेक‌िन बाद में इसकी महत्ता को देखते ही खुदाई रोक दी गई। आज कल यह मंद‌िर फ‌िर सुर्ख‌ियों में है। दरअसल, भारतीय पुरातत्व व‌िभाग ने इसकी खुदाई की अनुमति दे दी है। इस मंदिर को देखने के लिए लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। पुरातत्व विभाग भी मंदिर के बारे में जानकारी जुटा रहा है। 
विज्ञापन

3 of 6
900 yearl old temple
वक्रमुंडेश्वर महादेव मंदिर के नाम से व‌िख्यात मंद‌िर के बारे में पुरातत्व व‌िभाग के चंद्रस‌िंह चौहान ने अमर उजाला को बताया क‌ि खुदाई के ल‌िए आदेश हो चुके हैं। जल्द ही इसके बारे में अन्य जानकारियां जुटाई जाएंगी। पुरातत्व विभाग का अनुमान है कि ये मंदिर करीब नौ सौ साल पुराने हो सकते हैं।

4 of 6
900 yearl old temple
​क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई अधिकारी चौहान ने बताया कि कस्बे के वक्रमुंडेश्वर महादेव मंदिर में बीते दिनों स्थलीय निरीक्षण के बाद शिव मंदिरों की श्रृंखला की जानकारी मिली। इसके बाद टीम ने मंदिर के बारे में कई जानकारियां जुटाई। 
विज्ञापन

5 of 6
स्थानीय लोगों से मामले की जानकारी ली जा रही है। भगवान भरोसे अल्मोड़ा में धरोहर अल्मोड़ा जिले में ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण तथा पुरातत्व विभाग के अधीन संरक्षित तथा संरक्षण के लिए चिह्नित 80 से अधिक धरोहरें भगवान भरोसे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
बता दें क‌ि, इतिहास और संस्कृति की वाहक इन धरोहरों की सुरक्षा की केंद्र तथा राज्य सरकार को कोई चिंता नहीं है। राज्य के अंतर्गत क्षेत्रीय पुरातत्व विभाग ने कुमाऊं मंडल में 26 धरोहरों को संरक्षित किया है। इसमें अल्मोड़ा जिले में 12, बागेश्वर में दो, पिथौरागढ़ में चार और चंपावत में आठ धरोहरें शामिल हैं। इसके अलावा विभाग ने 13 अन्य धरोहरों को भी संरक्षण के लिए चिन्हित किया है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें