ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
उत्तराखंड आयुर्वेद विवि में एक रिटायर्ड प्रोफेसर को पांच साल का सेवा विस्तार देने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि नियम विरुद्ध सेवा विस्तार दिया गया है जबकि विवि कुलपति ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।
आयुर्वेद विवि के सेवा विस्तार मामले की शिकायत कुछ लोगों ने शासन में की है। आरोप है कि ऋ षिकुल परिसर की एक प्रोफेसर मार्च 2017 में रिटायर्ड होने वाली थीं। नियमों के मुताबिक उन्हें जून 2017 तक का सत्र लाभ दिया गया। इसी बीच कैबिनेट की बैठक में आयुर्वेद शिक्षकों की रिटायरमेंट आयु 60 से 65 साल कर दी गई। शिकायत में कहा गया है कि उक्त प्रोफेसर को सेवा विस्तार का लाभ नहीं दिया जा सकता, क्योंकि वह नियमित सेवा में नहीं थी और 60 साल भी पूरे कर चुकी थीं। शिकायत में कहा गया है कि शासनादेश के आधार पर प्रोफेसर के सेवा विस्तार मांगने पर विवि ने शासन से मार्गदर्शन मांगा था। शासन के जवाब के बाद विवि के तत्कालीन वित्त अधिकारी ने उनके वेतन पर रोक लगा दी। इसके बाद प्रोफेसर कुछ माह तक छुट्टी पर रहीं। आरोप है कि अब फि र से उन्होंने अपने वेतन और सेवा विस्तार का दावा प्रस्तुत किया। जिस पर अवकाश स्वीकृत कर उन्हें वेतन की राशि का भुगतान कर पांच साल का सेवा विस्तार दे दिया गया है। हालांकि विवि प्रशासन इस तरह के आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है।
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आज से करीब डेढ़ दो साल पहले का यह नियम बदला गया था। इसका शासनादेश भी जारी हुआ था। सरकार के आदेश के हिसाब से ही जो भी क्राइटेरिया में आएगा, उसे लाभ मिलेगा। इसमें कोई भी ऐसा मामला नहीं है।
-प्रो. अभिमन्यु कुमार, कुलपति, आयुर्वेद विवि