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-हमारा चित संसार-आत्मा के बीच सेतु : आचार्य शिव प्रसाद

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हमारा चित्त संसार-आत्मा के बीच सेतु : आचार्य ममगाईं
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ब्यूरो/अमर उजाल/ देहरादून।
मोथरोवाला रोड़ स्थित बैंक कॉलोनी अजबपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने शुक्रवार को अध्यात्म और चित्त का मर्म श्रद्धालुओं को समझाया। इसके अलावा उन्होंने सनातन धर्म की विस्तार की जानकारी दी। इस दौरान बाल कृष्ण की मनमोहक झांकी भी प्रस्तुत की गई।
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कथा व्यास आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने बताया कि सनातन धर्म तो प्रत्यक्ष अनुभूति है, आत्म साक्षात्कार करने का अनन्य विश्वास का नाम ही सनातन धर्म है। आचार्य ने कहा कि मनुष्य जो कर्म करता है वे संस्कार निर्मित हैं। जीव के अनेक जन्मों में किए कर्म संस्कारों का समूह बन जाते हैं। इसके बाद मनुष्य देह प्राप्त कर संचित कर्म भोग लेते हैं। शेष कर्म अगले जन्म के लिए सुरक्षित रहते हैं। आचार्य ने बताया कि हमारा चित्त संसार और आत्मा के बीच सेतु है। चित्त जड़ है जो केवल आत्मा से प्रकाशित होता है। अध्यात्म के जरिए केवल उस चित्त को जाग्रत किया जा सकता है। पुराणों की दृष्टि में मनुष्य दर्पण की तरह शुद्ध है। जैसे दर्पण में स्वरूप का दर्शन नहीं हो सकता उसी तरह मनुष्य के मन व जीवन रूपी दर्पण में स्वरूप का दर्शन नहीं हो सकता। ऐसा इसलिए है कि दर्पण और देह में अपने स्वरूप को बनाने वाली विधि का ज्ञान नहीं होता। मनुष्य के जीवन में कई विचित्र अवसर आते हैं जब धर्म और कर्म का स्वरूप समझना कठिन हो जाता है। ऐसे में जाग्रत चित्त ही माध्यम बनता है। जिस प्रकार भगवान शंकर आशुतोष हैं क्रोध के बाद प्रसन्न होना उनका स्वभाव है। ऐसे ही हमें भी अपने जीवन में कष्टों के पश्चात ही प्रसन्नता लानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि दूसरे का हित करने के लिए हर समय तैयार रहें, अग्नि की तरह ऊपर बढ़ें, लेकिन दिखावा न करें। कथा के मौके पर प्रसाद के रूप में माखन-मिश्री बांटी गई। इस अवसर पर अमीता शर्मा, दीपांकार शमा, निधि, आरव, महावीर पंवार, कमांडेंट डीपी रतूड़ी, सुरेंद्र राणा, शांति देवी, प्रेम लता, उर्मिला, सरोजनी, अश्विनी, पुष्पा, आशीष, शिव प्रसाद आदि उपस्थित रहे।
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