चारों धामों के लिए अलग से यात्रा संचालन व्यवस्था बनाने के मामले में मंत्रिमंडल ने वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड से लेकर अन्य प्रसिद्ध मंदिरों की संचालन व्यवस्था का अध्ययन भी कराया। मंत्रिमंडल ने माना कि 1986 में बने वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के गठन के बाद से वहां की यात्रा व्यवस्था में अभूतपूर्व परिवर्तन आया।
मंदिर को मिली धनराशि से पर्याप्त विकास हुआ। बताया जाता है कि बदरीनाथ में 1939 से पहले सारा चढ़ावा रावल के पास ही जाता था। 1939 के बाद रावल के पास धार्मिक व्यवस्था के अधिकार रह गए थे। माना जा रहा है कि श्राइन बोर्ड के गठन के बाद चारों धामों की यात्रा व्यवस्था में भी बदलाव आएगा। यात्रियों को अधिक सुविधाएं दी जा सकेंगी।
श्राइन बोर्ड के गठन को मंत्रिमंडल से मंजूरी के बाद ही विरोध भी शुरू हो गया है। इसी विरोध की आशंका को देखते हुए सरकार ने शिकायतों के निपटारे के लिए दो उच्च स्तरीय समितियों के गठन को भी मंजूरी दी है।
सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल ने भी हक हकूक संरक्षित रखने पर भी जोर दिया। अब यह इस पर भी निर्भर करेगा कि प्रदेश सरकार किस तरह से हक हकूकधारियों को समझाने में कामयाब होती है।