राजधानी समेत राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित निजी स्कूलों की ओर से छात्रों और अभिभावकों से हर साल मनमाने तरीके से ली जा रही फीस व विभिन्न मदों में वसूले जा रहे शुल्क को लेकर बाल शिक्षण आयोग का रुख सख्त हो गया है। उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग में बुधवार को सुनवाई के दौरान आयोग अध्यक्ष ऊषा नेगी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी देहरादून को आदेश जारी किए कि वह स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से वसूली जा रही फीस की जांच कर कार्रवाई करें और आयोग को भी अपनी रिपोर्ट सौंपे। इसके अलावा आयोग ने एक मामले की सुनवाई करते हुए अभिभावक को फीस जमा कराने में राहत देते हुए कहा कि वह एकमुश्त फीस की जगह सुविधानुसार फीस जमा कर सकते हैं।
उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग में बुधवार को कई मामलों की सुनवाई हुई। ओलंपस हाईस्कूल की ओर से एक छात्र के अभिभावक से त्रैमासिक शुल्क वसूली और विभिन्न मदों में शुल्क वसूलने पर सुनवाई करते हुए आयोग ने आदेश जारी किया कि अभिभावक अपनी सुविधानुसार त्रैमासिक की जगह मासिक शुल्क जमा कर सकते हैं। महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज की ओर से दसवीं के छात्र को निष्कासित करने के संबंध में प्रधानाचार्य धर्मेंद्र भट्ट और कोच लोकेश कुमार की ओर से तर्क देते हुए कहा कि केवल उन्हीं छात्रों को निकाला जा रहा है जिनका प्रदर्शन ठीक नहीं है।
इस पर आयोग अध्यक्ष ने निर्देश जारी किया कि छात्र को एक माह का समय दिया जाए। इसके अलावा आयोग ने न्यू दून ब्लॉसम स्कूल में छात्रा के मानसिक उत्पीड़न किए जाने की भी सुनवाई की। इस दौरान प्रधानाचार्य प्रतिभा शर्मा ने आश्वासन दिया कि छात्रा की काउंसिलिंग करते हुए समस्त समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। सुनवाई के दौरान एक बच्चे को दंपति द्वारा मारने पीटने का मामला भी प्रस्तुत किया गया। आयोग ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए दंपति को हिदायत दी कि वे भविष्य में बच्चे के साथ ऐसा बिल्कुल भी न करें। हिदायत दी वह आपसी सहमति से बच्चे की समस्या का समाधान करें। अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।