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सीएम ने दिए कोटिकरण की विसंगतियां सुधारने के निर्देश

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सीएम ने दिए कोटिकरण की विसंगतियां सुधारने के निर्देश
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने विद्यालयों के कोटिकरण में हुई विसंगतियों को सुधारने के निर्देश दिए हैं। बृहस्पतिवार को राजकीय शिक्षक संघ के महामंत्री डा. सोहन सिंह माझिला ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर विसंगतियों का मामला रखा।
डॉ. माझिला ने मुख्यमंत्री को बताया कि 2008 के कोटिकरण में जो विद्यालय सुगम थे, उन्हें 2013 में दुर्गम दिखाया जा रहा है। इससे शिक्षकों को पूर्व की सेवा का लाभ नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री ने सचिव विद्यालयी शिक्षा डॉ. भूपिंदर कौर औलख से वार्ता के लिए फोन पर संपर्क किया लेकिन उनके नैनीताल हाईकोर्ट में होने के चलते बात नहीं हो सकी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने सचिव राधिका झा को मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने शुक्रवार को इस मामले में अधिकारियों की बैठक बुलाने के भी निर्देश दिए।
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क्या है मामला
प्रदेश में वर्ष 2008 में पहली बार विद्यालयों का कोटिकरण किया गया। सीडीओ की अध्यक्षता में बनी समिति ने जिला स्तर पर विद्यालयों को सुगम और दुर्गम में बांटा। इसके बाद 2013 में दोबारा कोटिकरण हुआ तो करीब पौने दो सौ विद्यालय सुगम से दुर्गम में आ गए। तब मंडल स्तर पर विद्यालयों का कोटिकरण किया गया। 19 सितंबर 2016 को दुर्गम की सेवाओं का लाभ देने के लिए नया शासनादेश जारी हुआ था। शासनादेश के अनुसार, 2004 में जो अति सुगम था उसे बी, सुगम को सी, दुर्गम को डी और अति दुर्गम को ई श्रेणी देने के निर्देश दिए गए। अब एक्ट के अनुसार कोटिकरण में शिक्षकों की 2000 से 2008 और 2013 से 2018 तक के गुणांक दर्शाने को कहा गया है। इससे 2000 से 2008 तक की दुर्गम की सेवा करने वालों की 2013 तक की सेवा सुगम में गिनी जाएगी। जिसका उन्हें भविष्य में नुकसान झेलना पड़ सकता है।
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