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आश्रम से बच्चे गायब हुए बच्चों गुत्थी उलझी

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आश्रम से गायब हुए बच्चों की गुत्थी उलझी
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। आश्रम से बच्चे गायब होने की गुत्थी उलझती जा रही है। इस मामले में पुलिस भी सत्यापन में जुट गई है। बताया जा रहा है कि कुछ बच्चों का सत्यापन हो चुका है लेकिन इसकी जानकारी न तो आश्रम के पास है और न ही आयोग व समिति साझा कर रही है। कुल मिलाकर अभी तक गायब 18 बच्चों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। हालांकि आश्रम प्रबंधन के अनुसार ये सभी वे बच्चे थे, जो पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने अपने घर चले गए।
दरअसल, 9 अगस्त 2017 को बाल आयोग के सदस्य शैलेंद्र शेखर करगेती ने कड़वापानी स्थित हरिओम आश्रम का निरीक्षण किया था। उस दौरान आश्रम में 57 बच्चे रह रहे थे। वहीं जब पिछले माह बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने इस आश्रम का निरीक्षण किया तो वहां 39 बच्चे ही मौके पर मिले। आश्रम से 18 बच्चे गायब थे। अध्यक्ष ने बताया कि इस पर आयोग अध्यक्ष ने मानव तस्करी की आशंका के चलते एसआईटी जांच की संस्तुति की थी। इस संबंध में शासन को पत्र लिखा गया था।
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वहीं अब स्थिति ये है कि इस मामले में बाल कल्याण समिति और आयोग में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चल रहा है। बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष कविता शर्मा का कहना कि आश्रम से अनुपस्थित 18 बच्चों की सूची आयोग से मांगी गई थी। साथ ही आयोग से पत्र के माध्यम से यह भी जानकारी मांगी है कि जब आश्रम में उन्हें बच्चों की संख्या में कम मिली तो उन्होंने उस पर क्या कार्रवाई की? आश्रम से मिली सूची की जांच का पुलिस से वेरिफिकेशन कराया जा रहा है। इसके साथ ही समिति 2016 से अब तक जितने बच्चे घर भेजे गए हैं, उनका भी वेरिफिकेशन कराया जा रहा है।
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28 सितंबर को आश्रम संचालक ने जिला प्रोबेशन विभाग में आश्रम की एनओसी निरस्त करने के लिए पत्र भेजा था। जिस पर एनओसी निरस्त करने से पहले जिला समाज कल्याण निदेशक योगेंद्र यादव ने बाल कल्याण समिति के माध्यम से सभी बच्चों को सुरक्षित घर पहुंचाने की बात कही थी। सोमवार को आश्रम संचालक महंत अनुपमानंद गिरि ने बताया कि सभी बच्चों का सत्यापन किया जा रहा है। पुलिस घर-घर जाकर सत्यापन कर रही है।
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