सबक सीखा पर सबक सिखाना भूली सरकार
अमर उजाला/ब्यूरो
देहरादून। बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले के बाद प्रदेश सरकार ने इसके आवंटन की प्रक्रिया में कई अहम सुधार किए। इन सुधारों से छात्रों की छात्रवृत्ति पाने की मुराद भी पूरी हुई। सरकार ने घोटाले से तो सबक सीखा मगर घोटाले के लिए जवाबदेह और जिम्मेदार लोगों को सबक सिखाना भूल गई।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के घोटाले की जांच कराने के आदेश तक ठंडे बस्ते में डाल दिए गए। मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग को एसआईटी का गठन कर तीन महीने में जांच कराने के निर्देश दिए थे। मगर शासन से लेकर विभाग तक एसआईटी के गठन और जांच की कार्रवाई से जुड़े सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।
ये सीखा सबक
अलबत्ता दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना में घोटाला उजागर होने के बाद एक सकारात्मक कार्रवाई जरूर हुई कि छात्रवृत्ति आवंटन की प्रक्रिया को जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के प्रयास हुए। पिछले तीन वित्तीय वर्ष की अटकी छात्रवृत्ति को चरणबद्ध तरीके से बांटने का कार्य हुआ। पुरानी छात्रवृत्ति समाज कल्याण विभाग के पोर्टल के माध्यम से बांटी जा रही है। अब तक 66 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति का आवंटन हो चुका है और निदेशालय ने 24 करोड़ रुपये की और डिमांड की है। जारी वित्तीय वर्ष के लिए नेशनल पोर्टल पर पंजीकरण हो रहा है। पंजीकरण के बाद इस साल की छात्रवृत्ति 31 मार्च तक बांट दी जाएगी। अगले वित्तीय वर्ष सभी छात्रवृत्ति का आवंटन नेशनल छात्रवृत्ति पोर्टल के माध्यम से होगा। अपर सचिव (समाज कल्याण) राम बिलास यादव के मुताबिक, 31 मार्च तक छात्रवृत्ति का आवंटन कर दिया जाएगा।
सबक नहीं सिखाया
अपर सचिव स्तर के अधिकारी अध्यक्षता में गठित समिति की जांच में घोटाले की पुष्टि हुई। लेकिन इस रिपोर्ट पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ‘अमर उजाला’ के हाथ लगी प्रकरण से जुड़ी पत्रावली से यह तथ्य उजागर होता है कि जांच रिपोर्ट पर तत्कालीन मुख्य सचिव एस. रामास्वामी ने प्रकरण की सीबीआई, सतर्कता या सीबीसीआईडी से जांच कराने की संस्तुति की थी। साथ ही घोटाले की जांच में लीपापोती करने वाले तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी व जांच समिति के सदस्यों पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें निलंबित करने की सिफारिश की थी। फाइल पर मुख्यमंत्री ने एसआईटी गठित कर तीन माह में जांच रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। शासन से लेकर निदेशालय तक किसी अफसर के पास एसआईटी के गठन और जांच के सवाल का जवाब नहीं है।