नई टिहरी। प्रतापनगर के लिए बन रहे चांठी-डोबरा पुल के निर्माण में तेजी आने लगी है। चांठी साइड से मुख्य सड़क को जोड़ने के लिए बनाए जा रहे एप्रोच पुल का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि सात सौ मीटर कैटवॉक में से पांच सौ मीटर बन गए हैं। दो सौ मीटर कैटवॉक का निर्माण चल रहा है, जो जून अंत तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद मुख्य पुल को जोड़ने को रस्से खिंचने का काम शुरू होगा। पुल के फेब्रिकेशन के 15 सौ टन सामग्री भी रोपड़ पंजाब से साइड पर पहुंच चुकी है।
टिहरी बांध की झील के ऊपर 11 वर्ष से बन रहे चांठी-डोबरा पुल के निर्माण की धीमी गति रफ्तार पकड़ने लगी है। 42 वर्ग किमी में फैली झील के भागीरथी एवं भिलंगना घाटी में दोपहर एक से पांच बजे के बीच तेज हवाएं चलती हैं, जिससे रस्सों के सहारे टावरों काम करना मजदूरों के लिए चुनौती से कम नहीं है। एक साल से कैटवॉक, टावर स्टैथनिंग और चांठी साइड से मुख्य पुल तक पहुंचने के लिए 25 मीटर लंबा, छह मीटर चौड़े एप्रोच ब्रिज काम चल रहा था। वर्तमान में सात सौ मीटर कैटवॉक में से पांच सौ मीटर तैयार हो गए हैं, एप्रोच ब्रिज बन चुका है। कार्य में प्रगति को देखते हुए लोनिवि ने मुख्य पुल को जोड़ने के रस्से, गार्डर, प्लेटें समेत अन्य 15 सौ टन की सामग्री जो पंजाब के रोपड़ में बनाई जा रही थी, उन्हें साइड पर पहुंचा दिया है। जुलाई से रस्से खींचने का काम शुरू होकर सितंबर तक पूरा होगा। उम्मीद की जा रही है कि एक साल में पुल तैयार हो जाएगा।
कोट
एप्रोच पुल तैयार हो गया है। सात सौ में से पांच सौ कैटवॉक बन गए हैं। बाकी इस माह के अंत तक पूरे हो जाएंगे। इसके बाद मुख्य पुल को जोड़ने के रस्से खिंचने का काम शुरू हो जाएगा। - एसएस मखलोगा, सहायक अभियंता, लोनिवि चांठी-डोबरा पुल।