हर माह इस पड़ोसी देश के नागरिक गायब हो रहे हैं। इसके पीछे छिपे राज का खुलासा हो गया है, जिसका कनेक्शन भारत के इस एक राज्य से है।
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गंगोत्री चेरिटेबिल हॉस्पिटल में किडनी चोरी किए जाने का मामला पकड़ में आने के बाद उत्तराखंड के मानव तस्करी ‘गेट वे’ के साथ अब मानव अंग तस्करी का ‘डेस्टीनेशन’
बनने के भी सबूत मिल रहे हैं।
वैसे नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार से तस्करी कर लाए जाने वाले लोगों की खेप यहां से महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल आदि प्रांतों में भेजी जाती रही, लेकिन किडनी चोरी के मामले के खुलासे के बाद यह शक किया जा रहा है कि मानव अंग तस्करों ने प्रदेश को अपना डेस्टीनेशन बना लिया है और ये और भी स्थानों पर यही खेल कर रहे हैं।
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बांग्लादेश और म्यांमार की लड़कियों से मिले मानव तस्करी के पुख्ता सबूत
महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जाने वाले लड़कियों का कुछ पता नहीं
मानव तस्करी के मामले का खुलासा वर्ष 2012 में रुड़की पुलिस ने उजागर किया था। पुलिस के छापे में कुछ लड़कियां बरामद हुई थीं।
इन लड़कियों ने बताया कि उनकी कुछ साथियों को महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल भेजा गया। इन प्रांतों में जाने वाले लड़कियों का अब कुछ पता नहीं हैं। इसके साथ ही नारी निकेतन आईं बांग्लादेश और म्यांमार की लड़कियों से मानव तस्करी के पुख्ता सबूत मिले।
अपर सचिव मनोज चंद्रन के प्रयासों से उन्हें घर भेज दिया गया, लेकिन गोपनीय स्तर पर छानबीन में तस्करों का एक सशक्त नेटवर्क उजागर हो गया।
हर माह उत्तराखंड के रास्त हो रही 50 से 60 लोगों की तस्करी
50 से 60 लोग हर महीने उत्तराखंड के रास्ते तस्करी किए जा रहे हैं
- फोटो : demo
इसी साल मार्च में काठमांडू में हुए नेपाल की संस्था मिताई के सम्मेलन में कहा गया कि 50 से 60 लोग हर महीने उत्तराखंड के रास्ते तस्करी किए जा रहे हैं।
इस सम्मेलन में मौजूद मानव तस्करी के खिलाफ काम करने वाली संस्था इम्पावरिंग पीपुल के मुख्य कार्यकारी ज्ञानेंद्र ने बताया कि कैलाई, सुरखेत, डेंकड़ी आदि गांवों से मानव तस्करी हो रही है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 में जब उन्होंने नेपाल से उत्तराखंड होकर दिल्ली जा रही बस में बैठे लोगों की शर्ट उतरवाई गई तो कई के पेट कटे हुए मिले। उनका कहना है कि पलायन के नाम पर विभिन्न जिलों के बहुत से युवा और बच्चे गायब हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैं मानव अंग तस्करों के गिरोह
पुलिस को भी बराबर अवगत कराया जा रहा है
- फोटो : अमर उजाला
इनके संबंध में कोई खोजबीन नहीं हुई और न ही जिलेवार आंकड़ा तैयार किया गया।
यह शासन, प्रशासन को पता करवाना चाहिए कि वे मानव अंग तस्करी का शिकार तो नहीं हुए हैं। पुलिस की कार्यशालाओं में भी मानव और मानव अंग तस्करी के संबंध में बराबर बताया जा रहा है।
मानव अंग तस्करों के गिरोह अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैं। इसकी जांच सीबीआई से ही कराई जानी चाहिए। इस संबंध में पुलिस को भी बराबर अवगत कराया जा रहा है। पुलिस कार्यशालाओं में भी यह बात बताई जाती है इधर कुछ सालों में मानव और मानव अंगों की तस्करी बढ़ रही है। अपराधी उत्तराखंड को अपना डेस्टीनेशन बना रहे हैं।
- ज्ञानेंद्र कुमार, मुख्य कार्यकारी, पीपुल इम्पावरमेंट