हिंदू रीति रिवाज में पंचांग महत्वपूर्ण स्थान रखता है। शादी समारोह हो या पूजा पाठ या फिर कोई अन्य शुभ कार्य बिना पंचांग की गणना के सभी अधूरे हैं, लेकिन मसूरी में एक 430 साल पुराना पंचांग संरक्षण के अभाव में नष्ट हो रहा है। दिवाकर नाम का यह हस्तलिखित पंचांग इतिहासकार गोपाल भारद्वाज के पास मौजूद है। यह पंचांग सन 1590 में लिखा गया था।
इतिहासकार गोपाल भारद्वाज बताते है उनका परिवार पीढ़ियों से इस पंचांग को सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहा है। भोजपत्र पर लिखा 122 पेज का यह पंचांग संरक्षण के अभाव में धीरे-धीरे नष्ट हो रहा है। हाथ में उठाते ही इसके पन्ने टूटने लगते हैं।
बताया कि इस दुर्लभ पंचांग के सरंक्षण के लिए वह शासन-प्रशासन से लेकर पुरातत्व विभाग और तत्कालीन राज्यपाल अजीज कुरैशी, डॉ. के के पॉल से भी गुहार लगा चुके हैं, लेकिन सभी जगह से सिर्फ आश्वासन ही मिला है। गोपाल भारद्वाज का कहना है कि पंचांग देश की धरोहर है। इसके संरक्षण के लिए शासन्र-प्रशासन को आगे आना चाहिए।
वहीं, नगर पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता का कहना है कि मसूरी के इतिहास से जुड़े दस्तावेज के सरंक्षण के लिए संबंधित विभाग को आगे आना चाहिए। इस तरह की धरोहर हमें अपने गौरवमयी इतिहास से जोड़ती हैं।
वहीं, विधायक गणेश जोशी ने कहा कि सैकड़ों साल पुराने इस दुर्लभ पंचांग को संरक्षित करने के लिए शासन-प्रशासन स्तर पर प्रयास किए जाएंगे। कहा कि पंचांग के संरक्षण कि लिए वह जल्द मुख्य सचिव से मुलाकात करेंगे। कहा कि किसी व्यक्ति के लिए ऐसी धरोहर को संरक्षित रख पाना संभव नहीं है।