अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
जनपद के प्रभारी मंत्री की पहली बैठक में विधायक अधिकारियों पर गरम रहे। जबकि सरकार बनने के बाद पहली मर्तबा अधिकारियों से रूबरू हुए प्रभारी मंत्री सतपाल महाराज का रुख थोड़ा नरम रहा। हालांकि उन्होंने विधायकों के साथ तालमेल बनाकर काम करने की हिदायत अफसरों को जरूर दी।
लक्सर विधायक संजय गुप्ता ने कहा कि बरसात जल्द शुरू होने जा रही है और लक्सर में तटबंध कमजोर हैं। विधायक ने कहा कि वे रोजाना सिंचाई विभाग के अधिकारियों को फोन करते हैं, लेकिन अफसर कोई संज्ञान नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी जल्द बरसात शुरू होने पर रेत के कट्टे भरकर डालने की तैयारी में हैं। बैठक में मौजूद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तटबंध बनाने के लिए बजट ही नहीं है। इतना ही नहीं पिछले साल के तटबंध निर्माण का आधा भुगतान भी नहीं हो पाया है। इस पर सतपाल महाराज ने बजट का प्रस्ताव बनाकर भेजने के निर्देश दिए। मेयर मनोज गर्ग ने भी सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर जमकर भड़ास निकाली। मेयर का कहना था कि नगर निगम क्षेत्र की जितनी भी पार्किंग हैं, उनका राजस्व निगम को मिलना चाहिए। यदि ऐसा न हुआ तो वह मेला क्षेत्र में सफाई नहीं कराएंगे। सफाई कर्मचारियों को तनख्वाह सिंचाई विभाग खुद दे। मेयर मनोज गर्ग का रुड़की मेयर यशपाल राणा ने समर्थन किया। सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने शासन के निर्देश का हवाला दिया तो मेयर का पारा और चढ़ गया। मेयर ने मंत्री सतपाल महाराज की तरफ इशारा करते हुए कहा कि शासन यहां मौजूद है। साथ ही अधिकारी को चेतावनी दी कि यदि पार्किंग का टेंडर कराया तो अच्छा नहीं होगा। वहीं झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल ने कहा कि विधायक लगातार बैठकों में आते हैं।
इससे पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और सांसद निशंक की दिशा जैसी बैठकों में इतने सुझाव और प्रस्ताव लाने के बावजूद उनपर कोई कार्रवाई नहीं होती, ऐसे में बैठकों का क्या फायदा। बैठक में लगभग सभी विधायकों ने अधिकारियों को अपने तल्ख तेवरों का अहसास कराया, पर सतपाल महाराज गुस्सा न होकर अधिकारियों को हिदायत देते रहे।
मेयर बोले, मंत्री जी अधिकारी को सस्पेंड करो
मेयर मनोज गर्ग ने बैठक में कांवड़ पटरी की बदहाली का मुद्दा भी उठाया। मेयर ने कहा कि लिखित एग्रीमेंट होने के बावजूद सिंचाई विभाग के अधिकारी कांवड़ पटरी को हरा भरा करने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। यह बात कहते हुए मेयर को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने सतपाल महाराज से मांग कर डाली कि अधिकारी को सस्पेंड करो। अधिकारी बैठक में मौजूद ही नहीं था।