जो पानी लोगों की जिंदगी के लिए सबसे ज्यादा तत्व है, वहीं पानी गढ़ गांव के लोगों के जहर से कम नहीं है। आलम यह है कि पिछले चार माह से गांव में दहशत है।
दूषित पानी पीने से अब तक इस गांव में महिलाओं और बच्चों सहित 27 लोगों की जीवन लीला समाप्त हो चुकी है। मौत का कारण ग्रामीण दूषित पानी से होने वाली पीलिया, डायरिया आदि बीमारियां बता रहे हैं।
बहादराबाद क्षेत्र के गांव गढ़ में लगातार हो रही मौतों से गांव के ग्रामीणों को सदमें में डाल दिया है। गांव में एक के बाद एक हो रही मौतों से हड़कंप मचा हुआ है। अधिकांश लोगों की मौत कैंसर, पीलिया, डायरिया, अस्थमा से हुई है।
कुछ लोगों की मौत का कारण स्पष्ट भी नहीं हो सका है। लगातार हो रही मौतों के चलते कुछ ग्रामीण तात्रिकों के यहां पर चक्कर काट रहे हैं तो कुछ लोगों का मानना है कि गांव का पानी दूषित हो चुका है। जिसके कारण बीमारी फैल रही है और मौत हो रही है।
गांव के आसपास के माहौल पर नजर डाले तो तालाब में वर्षों से जमा गंदा पानी और गांव के गंदे पानी की उचित निकासी का न होना है।
बढ़ती मौतों पर हुई पंचायत
पिछले शुक्रवार को हुई एक किशोरी की मौत ने ग्रामीणों को सदमे में डाल दिया है। ग्रामीणों को भय है कि किसी प्रेत की साया गांव पर है। ग्रामीण इस मसले को हल करने को गांव में पंचायत की है।
पंचायत में भी ग्रामीणों ने किसी तांत्रिक के प्रभाव को माना है। ग्रामीण छोटेलाल, बीर सिंह, रवि, श्याम कुमार, आदि का कहना है कि चार महीनों में 27 मौतें हो चुकी है।
इन लोगों की हुई है मौत
40 वर्षीय धर्मी पत्नी बालूराम, 48 वर्षीय बेलचंद पुत्र मंगन, 36 वर्षीय रमेश पुत्र रतना, 45 वर्षीय सुरेश पुत्र कृष्णा, 1 वर्षीय आदिती पुत्री अरविंद, 13 वर्षीय शिवानी पुत्री शेर सिंह, 38 वर्षीय सुजीये बाबूराम, 45 वर्षीय कश्मीरी, 22 वर्षीय नेत्रपाल, 40 वर्षीय मांगेराम, 40 वर्षीय धन्नोदेवी पत्नी छोटेलाल आदि।
पानी की टंकी ठप पड़ी
गांव में 2003 में पानी की टंकी बनी थी, लेकिन अभी तक वह शोपीस बनी हुई है। पानी को टंकी को चालू नहीं किया गया है और न ही सप्लाई के पाइप लाइन बिछाई जा सकी है।
पिछली योजना के ग्राम प्रधान और वर्तमान प्रधान विभागों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन बजट न होने का बहाना कर चलता कर दिया जाता है।
ग्राम की समस्या को कई बार अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका हैं, बहादराबाद स्थित स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय पर कई बार सूचना की जा चुकी है। लेकिन कोई भी गांव की रिपोर्ट लेने कोई नहीं आता, गांव के लोग अपने हाल पर है और जवान लोग अपने बीच से कम होते जा रहे है।
-राजेंद्र, ग्राम प्रधान पति।
27 मौतों के बाद चेता प्रशासन
मामला बेहद गंभीर है, अभी तक उन्हें ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली थी। गांव के पानी की जांच कराई जाएगी। दूसरे लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण भी वहीं मशीनें ले जाकर कराया जाएगा। सोमवार को टीम भेजी जाएगी।
-डॉ. सुषमा गुप्ता, सीएमओ, हरिद्वार।
गढ़ गांव के पानी से लेकर अन्य खाद्य पदार्थों और प्रदूषण की रिपोर्ट तैयार कराई जाएगी। पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम को जांच के लिए भेजा जाएगा। पानी सप्लाई के बनाई गई टंकी को चलाने को प्रयास किया जाएगा।
-वीएस धनिक, सीडीओ, हरिद्वार।
गांव के लोग बोले
गांव के लोग बीमार होते हैं और कुछ दिन बाद ही बीमारी के चलते मौत हो जाती है। गांव में दहशत बनी हुई है, गांव में चारों ओर यही चर्चा होती रहती है।
-मूलचंद, ग्रामीण
गांव में पानी सरकारी हैंडपंपों से लिया जाता है, लेकिन कभी-कभी गंदा पानी आता है तो कभी साफ। पानी के लिए कोई अन्य सुविधा भी नहीं है, मजबूरी में इन्हीं हैंडपंपों से पानी लिया जाता है।
-खुर्शीद, ग्रामीण।
गांव से हर सप्ताह कोई न कोई व्यक्ति मौत को प्राप्त हो जाता है। लेकिन कभी कोई सरकारी अधिकारी गांव में नहीं आता। गांव के लोग किस बीमारी से मर रहे है कोई भी बताते को तैयार नहीं है।
-महबूब, ग्रामीण।