ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
केंद्र सरकार ने कोस्ट गार्ड ट्रेनिंग सेंटर के रूप में उत्तराखंड को एक और सौगात दी है। ट्रेनिंग सेंटर खुलने से प्रदेश के युवाओं को जहां कोस्ट गार्ड में शामिल होने का अवसर मिलेगा वहीं रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे। यह जानकारी सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देश के पहले अत्याधुनिक ‘ड्रोन एप्लीकेशन सेंटर एंड साइबर सिक्योरिटी सेंटर’ के उद्घाटन के दौरान दी। उन्होंने कहा कि केंद्र ने कोस्ट गार्ड का ट्रेनिंग सेंटर खोलने की स्वीकृति दे दी है, जो हमारे लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के चुनिंदा पॉलीटेक्निक में अब ‘ड्रोन टेक्नोलॉजी’ की भी पढ़ाई होगी।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को राजधानी के सहस्त्रधारा रोड स्थित आईटी पार्क में ‘ड्रोन एप्लीकेशन सेंटर एंड साइबर सिक्योरिटी सेंटर’ का उद्घाटन किया। इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य है, जिसने इस तरह का अत्याधुनिक सेंटर खोलने की पहल की है। यहां से प्रशिक्षित युवाओं की मदद से न सिर्फ प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत-बचाव अभियान में मदद मिलेगी बल्कि अत्याधुनिक ड्रोन के जरिये लापता लोगों को खोजने में भी मदद मिलेगी। सीएम रावत ने कहा कि राज्य के ज्यादा से ज्यादा युवा ड्रोन टेक्नोलॉजी से प्रशिक्षित हों, इसके लिए चुनिंदा पॉलीटेक्निक में ड्रोन टेक्नोलॉजी की पढ़ाई भी कराई जाएगी।
उन्होंने साइबर सिक्योरिटी सेंटर को भी बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि इसमें प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मदद से साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही साइबर अपराधों को अंजाम देने वालों को पकड़ने में भी आसानी होगी। नेशनल ट्रेनिंग रिसर्च आर्र्गनाइजेशन के चेयरमैन आलोक जोशी ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों के चलते ड्रोन एप्लीकेशन सेंटर बेहद मददगार साबित होगा। आने वाले दिनों में यह सेंटर ‘ड्रोन हब’ साबित होगा।
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प्राकृतिक आपदा से निपटने में मददगार होगा सेंटर
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि ‘ड्रोन एप्लीकेशन सेंटर एंड साइबर सिक्योरिटी सेंटर’ का निर्माण बेहद कम समय में किया गया है। तेजी से पांव पसार रहे साइबर अपराधों को रोकने में यह सेंटर बेहद मददगार साबित होगा। साथ ही ड्रोन सेंटर में उत्तराखंड के युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार के अवसर मुहैया कराए जाएंगे। ड्रोन एप्लीकेशन सेंटर आने वाले समय में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में मददगार साबित होगा।
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सेंटर पूरी करेगा साइबर विशेषज्ञों की जरूरत
सूचना प्रौद्योगिकी सचिव आरके सुधांशु ने कहा कि वर्तमान में साइबर सिक्योरिटी एक बड़ी चुनौती है। आंकड़े पेश कर उन्होंने कहा कि एक सर्वे के मुताबिक, साइबर अपराधों के चलते प्रतिदिन चार मिलियन डॉलर की रकम अपराधियों के हाथ चली जा रही है। आने वाले समय में देश में एक करोड़ से अधिक साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों की जरूरत होगी, जिन्हें प्रशिक्षित करने में यह सेंटर अपनी भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर विधायक गणेश जोशी, डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अशोक कुमार, आईजी अमित सिन्हा, डीआईजी गढ़वाल अजय रौतेला, एसएसपी निवेदिता कुकरेती, एसपी सिटी पी के राय समेत कई पुलिस अधिकारी और अन्य लोग उपस्थित थे।
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प्रशिक्षणार्थियोें को मानदेय देगा एनटीआरओ
कार्यक्रम के दौरान नेशनल ट्रेनिंग रिसर्च आर्र्गनाइजेशन के चेयरमैन आलोक जोशी ने एलान किया कि सेंटर में प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को पांच हजार से 25,000 तक का मानदेय दिया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा प्रशिक्षण लेने के लिए आगे आएं। उनकी इस पहल का मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत सभी लोगों ने स्वागत किया।
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सोशल मीडिया में अफवाहों पर जताई चिंता
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया में तेजी से फैलती अफवाहों और इससे होने वाले नुकसान पर चिंता जताते हुए इस पर अंकुश लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ‘अनसोशल ’ हो गया है, जिसमें सुधार की जरूरत है।
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‘कृषक’ ड्रोन से होगा दवाओं का छिड़काव
देहरादून। ‘ड्रोन एप्लीकेशन सेंटर एंड साइबर सिक्योरिटी सेंटर’ के उद्घाटन अवसर पर ड्रोन के कई मॉडल प्रस्तुत किए गए। इसमें कृषक ड्रोन और मैपर खास रहे। विशेषज्ञों ने बताया कि कृषक ड्रोन की मदद से जहां फसलों पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर पैदावार बढ़ाई जा सकेगी वहीं मैपर की मदद से बेहद करीब से थ्री डी तस्वीरें ली जा सकेंगी। विशेषज्ञों ने बताया कि कृषक ड्रोन की मदद से चार मीटर ऊंचाई से कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा सकता है। इस दौरान विशेषज्ञों ने मुख्यमंत्री को हेक्साकॉप्टर, ऑक्टाकॉप्टर जैसे अत्याधुनिक ड्रोन के बारे में विस्तार से बताया। ड्रोन उड़ाकर यह भी दिखाया कि कैसे उबड़-खाबड़ तराई में छिपे अपराधियों को ड्रोन से ढूंढा जा सकता है।