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महज छह माह में गायब हुई मंडी की रौनक

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कर्णप्रयाग। करोड़ों की लागत से बनी मंडी समिति की दुकानें खाली पड़ी हैं। हालांकि, छह माह तक एक आढ़ती ने यहां सब्जी का कारोबार शुरू किया, लेकिन बाद में उसने भी यहां दुकानें बंद कर दीं। इसी प्रकार अन्य नौ लोगों ने भी यहां पर दुकानें तो लीं हैं लेकिन इनका संचालन नहीं हो रहा है।
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वर्ष 2011 में बदरीनाथ हाईवे के पास 415 लाख की लागत से मंडी समिति का परिसर तैयार किया गया। उद्देश्य था कि रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के किसान अपने उत्पाद सीधे मंडी में आकर बेच सकेंगे। इससे मंडी समिति की आय होने के साथ ही स्थानीय दुकानदारों को सस्ते दामों पर माल मिल सकेगा। इस उद्देश्य से मंडी समिति का कार्यालय, विक्रय चबूतरा सहित 10 दुकानें बनाई गईं, जिनका विधिवत उद्घाटन वर्ष 2014 में किया गया, लेकिन दुकानें लेने के बाद दुकानदार अब तक दुकानों को खोलने के लिए नहीं पहुंचे।
हालांकि, यहां दिसंबर 2016 में हरिद्वार के एक आढ़ती ने यहां सब्जी बेचने का काम शुरू किया। इससे उपभोक्ताओं को सस्ते दामों पर सब्जियां मिल रही थीं, लेकिन पिछले सप्ताह आढ़ती यहां से सामान समेट वापस चल दिया। इससे एक बार फिर मंडी समिति शोपीस बनकर रह गई। इधर, मंडी समिति के सचिव यूडी उनियाल ने बताया कि आढ़ती के अनुसार कुछ पारिवारिक परेशानियों और कुछ बाजारों में बढ़ती उधारी की वजह से धंधे में घाटा हुआ। इसके चलते फिलहाल आढ़ती ने यहां काम बंद किया है। वहीं अन्य दुकानदारों को भी काम शुरू करने के लिए कहा जा रहा है।
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