ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
पीपीपी मोड में कूड़ा उठान में कंपनी और नगर निगम के बीच यूजर चार्ज को लेकर छह माह से उपजा विवाद खत्म हो गया है। अनुबंध के बाद कंपनी खुद यूजर चार्ज वसूलेगी और कलेक्शन के हिसाब से निगम में जमा कराएगी। उम्मीद है कि अगले माह तक निगम और कंपनी के बीच अनुबंध हो जाएगा और जून से शहर का कूड़ा पीपीपी मोड में उठना शुरू हो जाएगा।
पिछले साल अक्तूबर में मेयर विनोद चमोली ने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन पीपीपी मोड में देने का निर्णय लिया। चेन्नई एमएसडब्ल्यू प्रा. लि. के साथ ही दो अन्य कंपनी ने अनुबंध के लिए आवेदन किया। निगम की टीम चेन्नई और हरियाणा गई। कंपनी के कार्यों की रिपोर्ट नगर आयुक्त को सौंपी। टेंडर चेन्नई एमएसडब्ल्यू प्रा. लि. को दे दिया गया। लेकिन यूजर चार्ज को लेकर मामला उलझ गया और अब तक अनुबंध नहीं हो सका। मेयर विनोद चमोली के मुताबिक बोर्ड बैठक में कूड़ा कलेक्शन को लेकर कंपनी के साथ अनुबंध कराने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई है। इस महीने अनुबंध हो जाएगा। इससे डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था सुधरेगी।
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निगम को कम मिल रहा यूजर चार्ज
वर्तमान में निगम को प्रतिमाह 12-13 लाख रुपये यूजर चार्ज मिल रहा है। जिसमें से करीब साढ़े सात लाख रुपये कूड़ा कलेक्शन में लगे कर्मियों के वेतन में खर्च हो रहा है। ऐसे में पीपीपी मोड में जाने के बाद हर महीने कम से कम 20 से 30 लाख रुपये यूजर चार्ज निगम को मिलने की संभावना है।
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हर महीने की हड़ताल से मिलेगी निजात
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में वर्तमान में लगे एजेंसी कर्मी हर महीने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले जाते हैं। जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। घरों से कई दिनों तक कूड़ा नहीं उठ पाता है। लेकिन, पीपीपी मोड में जाने के बाद व्यवस्थाएं सुधर जाएगी।