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अनुबंध की राशि जमा करा देंगे पर सरकारी नौकरी को तैयार नहीं

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ब्यूरो/अमर उजाला /देहरादून।
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अनुबंधन तोड़ने वाले 90 से अधिक डॉक्टर जहां विभाग की लंबी कवायद के बाद अब पहाड़ के दुर्गम अस्पतालों में सेवाएं देने को तैयार हैं। वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो अनुबंध की धनराशि लौटाने का जवाब दिया है। इसके अलावा कुछ डॉक्टरों ने विभिन्न पारिवारिक कारणों से कार्यभार ग्रहण करने में असमर्थता जताई है।
प्रदेश में डॉक्टरों की कमी दूर की जा सके इसके लिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में छात्र-छात्राओं को बहुत कम फीस पर अनुबंध के तहत मेडिकल की पढ़ाई कराई जाती है। अनुबंध के अनुसार पढ़ाई पूरी करने के बाद चिकित्सक को पहाड़ के दुर्गम के अस्पतालों में कम से कम पांच साल सेवाएं देनी होती हैं। इसके लिए सरकार की ओर से छात्रों के साथ 30 लाख एवं इससे अधिक का अनुबंध किया जाता है। अनुबंध तोड़ने की स्थिति में उक्त धनराशि सरकार के पास जमा करानी होती है। बहरहाल प्रदेश में डॉक्टरों के 50 फीसदी से अधिक पद रिक्त हैं। पहाड़ के दुर्गम के अस्पतालों के हालात पहले से ही बदतर हैं। ऐसे में हाल ही मेें नवनियुक्त चिकित्सकों द्वारा अनुबंध तोड़ने से स्थिति बिगड़नी लाजमी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि लंबी कवायद के बाद 90 से अधिक डॉक्टर दुर्गम में सेवाएं देने को तैयार हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार डॉक्टरों को नोटिस जारी होने के बाद श्रीनगर और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई करने वाले 10 डॉक्टरों ने अनुबंध की शर्त के अनुरूप 30 लाख रुपये जमा करा देने की बात कही है। इसके अलावा कुछ डॉक्टरों ने विभिन्न पारिवारिक कारणों से कार्यभार ग्रहण करने में असमर्थता जताई है।
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अनुबंधन तोड़ने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। नोटिस के बाद 90 से अधिक डॉक्टर दुर्गम अस्पतालों में सेवा को तैयार हो चुके हैं। वहीं कुछ चिकित्सकों का जवाब मिला है कि वे अनुबंध की शर्त के अनुरूप 30 लाख की धनराशि विभाग में जमा करा देंगे।
-डॉ. आशुतोष सयाना, निदेशक चिकित्सा शिक्षा
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