...तो रुक जाएगी 60 हजार की पेंशन
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। दो माह से चल रही कवायद में तमाम दावों के बावजूद अभी तक मात्र 15 हजार पेंशनरों का ही सत्यापन हो पाया है, जबकि जिले में 79800 हजार पेंशन लाभार्थी हैं। यह सत्यापन 30 जून तक होना है, जिसमें पांच दिन बाकी हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विभाग पांच दिनों में करीब 65 हजार पेंशनरों का सत्यापन कर पाएगा? ऐसे में अगर मान लिया जाए की पांच हजार पेंशनरों का और सत्यापन हो सकेगा तो बाकी के करीब 60 हजार तो पेंशन से वंचित किए जा सकते हैं!
उल्लेखनीय है कि सरकार की ओर से समाज कल्याण की मार्फत वृद्धों, विधवाओं और दिव्यांगों को एक हजार की पेंशन दी जाती है। जिसका सत्यापन कराने के लिए पेंशनरों को तमाम फजीहतें झेलनी पड़ रही हैं। शासन ने साफ कर दिया है कि अब पेंशन उन्हीं पेंशनरों को मुहैया कराई जाएगी, जिनका सत्यापन हो जाएगा। सत्यापन की प्रक्रिया दो माह से चल रही है। अब अगर विभाग की ओर से इन पेंशनरों का समय पर सत्यापन नहीं होता तो अगले महीने पेंशन के लिए उनको विभागों में भटकना पडे़गा। बता दें कि एक मई से समाज कल्याण विभाग पेंशनरों का भौतिक सत्यापन कर रहा है। जिसमें लोगों की काफी फजीहत हो रही हैं। जिसने तहसील पहुंचकर सत्यापन करा दिया, उन्हीं का सत्यापन हो पाया। जिन पेंशनरों का सत्यापन नहीं हुआ, उन्हें आशंका है कि कहीं पिछले सालों की भांति सत्यापन की खानापूर्ति कर सभी को अपात्र न दिखा दिया जाए। जबकि पिछले दिनों सत्यापन के लिए तहसील पहुंच रहे पेंशनरों को अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि घर-घर जाकर सभी का सत्यापन किया जाएगा।
जिले में ये है पेंशनरों के आंकड़े
वृद्धावस्था पेंशन - 52000
विधवा पेंशन -18000
दिव्यांग पेंशन - 9000
किसान पेंशन - 800
कोट :
जिले में करीब 75 हजार पेंशन लाभार्थियाें का सत्यापन होना है, जो प्रक्रिया में है। उम्मीद है कि अंतिम तिथि तक सत्यापन पूरा हो जाएगा।
- अनुराग शंखधर, जिला समाज कल्याण अधिकारी
-----
तहसील दिवस में भी लगा चुके हैं सत्यापन की गुहार
5 जून को तहसील दिवस में दिवस में कुल 69 समस्याएं दर्ज की गई थी, इनमें खास बात ये थी कि वे सभी पेंशन सत्यापन के संबंध में ही थीं। तब अधिकारियों ने सभी का मौके पर ही निस्तारण करने का दावा किया था।
सत्यापन के नाम पर अवैध वसूली के भी आरोप
देहरादून। एक हजार की पेंशन पाने के लिए मई के अंतिम दिनों में तहसील में सत्यापन कराने पहुंचें लोगों ने कर्मचारियों पर सुविधा शुल्क लेकर ही सत्यापन करने का आरोप लगाया था। तब लोगों ने हंगामा भी किया था। जबकि तब भी अधिकारी घर-घर जाकर पेंशन का सत्यापन करने का दावा कर रहे थे।