ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
उत्तराखंड क्रांति दल 2018 में होने वाले नगर निकाय चुनाव में अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेगा। चुनाव से पूर्व उक्रांद कार्यकर्ता जनता के बीच जाएंगे और प्रदेश में किसानों की दुर्दशा, बेरोजगारी और पलायन के मुद्दे पर सरकार को घेरेगा।
बुधवार को राजभवन के समीप एक गेस्ट हाउस में आयोजित उक्रांद की दो दिवसीय केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक के दूसरे दिन केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सरकार ने किसानों के कर्ज माफी से साफ इंकार कर दिया है। बिहार और उत्तरप्रदेश की तरह यहां भी कर्ज में डूबे किसान आत्महत्या करने लगे हैं। उत्तराखंड के यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि किसान पहले से ही जंगली जानवरों से परेशान है। फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। जानवर आबादी क्षेत्र में घुस रहे हैं। सरकार किसानों को मुआवजा तक नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि उक्रांद किसानों की लड़ाई लड़ेगी।
आरोप लगाया कि उत्तराखंड सरकार के निक्केमेपन की वजह से उत्तरप्रदेश से परिसंपत्तियों का बंटवारा नहीं हो सका है। राज्य की संपत्ति उत्तरप्रदेश के हवाले है। दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है, इसके बाद भी कोई पहल नहीं हो रही है। उपनल, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के मामले में भी दिवाकर भट्ट से सरकार पर सवाल उठाए।
उक्रांद नेता काशी सिंह ऐरी ने पलायन को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ पलायन आयोग बनाने तक सीमित है। बेरोजगारी से उत्तराखंड के पर्वतीय जिले खाली हो रहे हैं। कई गांव युवा विहीन हो गए हैं। सरकार युवाआें के साथ छल करते आ रही है। उन्होंने कहा कि उक्रांद इन सबका जवाब देगी और जनता के बीच सरकार का चेहरा बेनकाब करेगा। बैठक में बीडी रतूड़ी, त्रिवेंद्र पंवार, जगदीश बुधानी, चंद्रशेखर कापड़ी, बहादुर सिंह रावत, सुनील ध्यानी, आनंद, हरीश पाठक, अवतार सिंह, सरिता पुरोहित, शिवानंद चमोली, डीएन टोडरिया, पंकज व्यास, ब्रह्मानंद डालाकोटी, डीडी जोशी और जय प्रकाश उपाध्याय समेत कई उक्रांद नेता मौजूद थे।