कोटद्वार। विकासखंड दुगड्डा क्षेत्र के अंतर्गत 11 साल पहले स्वीकृत घराट-मुंडला मोटर मार्ग के निर्माण न होने से खफा ग्रामीणों ने मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है। कहा कि पौड़ी जिले के दुगड्डा ब्लाक में 11 साल पहले स्वीकृत सड़क के निर्माण में अनावश्यक पेच फंसाए जा रहे हैं। राज्य में जहां एक ओर नेता और अधिकारी मौज में हैं, वहीं जनता को एक अदद सड़क सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। इक्कीसवीं सदी में जनता को रोजमर्रा के कार्यों के लिए मीलों पैदल चलना पड़ रहा है। स्व. सरोजनी देवी लोक विकास समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि शासन, प्रशासन और वन विभाग ने घराट-मुंडला मोटर मार्ग के निर्माण की फाइल को फुटबाल बनाकर रख दिया है, जो यहां की जनता के अधिकारों का खुल्लमखुल्ला घोर उलंघन है। कहा कि समिति ने ग्रामीणों की दयनीय हालत और उपेक्षा पर मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखा है। कहा कि 11 साल पूर्व तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2005-06 में 1 करोड़ 39 लाख रूपये की धनराशि स्वीकृत करते हुए 10 किमी मोटर मार्ग निर्माण की मंजूरी प्रदान की थी, लेकिन सड़क निर्माण की फाइल सरकार में धूल फांक रही है। जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि संविधान के नियमों का उल्लंघन कर जनता को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखने का उदाहरण है। इसी उपेक्षा के चलते उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों के गांवों से पलायन हो रहा है।
कहा कि वर्ष 2009 में लोक निर्माण विभाग दुगड्डा को 1 करोड़ 39 लाख रुपये की धनराशि तत्कालीन सरकार ने स्वीकृत की थी। मोटर मार्ग में आड़े आने वाली 8.10 हेक्टेयर वन भूमि के एवज में ग्रामीणों ने अपनी नापखेत भूमि भी वन विभाग को हस्तांतरित की थी, इसके बावजूद घराट-मुंडला मोटर मार्ग का निर्माण नहीं हो पाया। वन विभाग ने शिवालिक ऐलीफेंट कोरिडोर का मामला बताते हुए यह मामला स्वीकृति के लिए राज्य वन्यजीव बोर्ड के पास भेजकर पेच फंसा दिया है।