ऊखीमठ। यहां रविवार रात हुई पौने चार घंटे की मूसलाधार बारिश ने पौने पांच साल पहले 13/14 सितंबर 2012 को हुई तबाही की याद दिला दी। लोग रात भर सो नहीं पाए। मूसलाधार बारिश के साथ ही बिजली की तेज गड़गड़ाहट और उफनते नालों के शोर ने उनका चैन छीन लिया।
25 जून की रात करीब आठ बजे से पौने 12 बजे तक हुई मूसलाधार बारिश, बादलों की गर्जना और चारों तरफ उफनते नालों ने लोगों को रातभर डरा कर रखा। घरों के आगे-पीछे, दाएं-बाएं से मलबा और बरसाती पानी के फव्वारे फूट रहे थे। ऐसी में लोग अपनी जान बचाएं या घर/दुकानों को सुरक्षित करें। आसमान से बरसती आफत और चमचमाती बिजली से खतरे की आशंका से लोग भयभीत थे। प्रभावित योगेंद्र सिंह ने बताया कि एक देवदार के पेड़ पर तेज आवाज के साथ आसमानी बिजली गिरी तो लगा कि पूरा मकान ढह गया है। कुछ देर के लिए आंखों में अंधेरा छा गया। समझ में नहीं आ रहा था कि घर से बाहर निकलें या फिर अंदर ही रहें। चार साल पूर्व की आपदा का मंजर आंखों में कौंदने लगा। बता दें कि 13/14 सितंबर 2012 की रात्रि को नगर क्षेत्र से लगे चुन्नी, मंगोली, ब्राह्मणखोली आदि गांवों के ऊपर बादल फटने से 64 लोग मलबे में दबकर काल का ग्रास बन गए थे। प्रभावित बीएस राणा ने बताया कि सितंबर 2012 की आपदा के बाद से ही नगर क्षेत्र संवेदनशील बना हुआ है। शासन, प्रशासन को कई बार अवगत कराने पर भी उनकी सुध नहीं ली जा रही है। जिस तरह मूसलाधार बारिश के साथ आसमानी बिजली कड़क रही थी, उससे डर लग रहा था कहीं, कोई बड़ी अनहोनी न हो। उनके घर के पीछे मलबे का ढेर लग गया, जो खिड़कियों के रास्ते कमरों में घुस गया।
नगर पंचायत अध्यक्ष रीता पुष्पवाण का कहना है कि पिछले चार वर्षों से शासन और प्रशासन द्वारा ऊखीमठ नगर की सुरक्षा के लिए न तो कोई योजना बनाई गई है, और न ही कोई कार्य हुआ है। पिछले दो वर्ष से निर्माणाधीन पेेंज-करोखी मार्ग नगर के कई घरों के लिए समस्या बन गया है। बारिश में सड़क का पानी घरों में घुस रहा है, जिससे कभी भी किसी अनहोनीे से इंकार नहीं किया जा सकता है।