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बस हादसा, 44 हुए घायल, स्ट्रेचर मात्र सात

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पौड़ी। धुमाकोट बस हादसे के बाद रविवार को मॉकड्रिल के दौरान एक बार फिर राहत एवं बचाव कार्य की पोल खुुल गई है। बस हादसे की सूचना में बताया गया कि अछरीखाल के पास बस गहरी खाई में गिरी है, जिसमें आठ की घटनास्थल पर ही मौत हो गई और 44 यात्री घायल हैं, लेकिन राहत एवं बचाव कर्मी गिनती के मात्र सात स्ट्रेचर लेकर घटनास्थल पर पहुंचे।
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बस हादसे की सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पहुंचे अपर जिलाधिकारी रामजी शरण शर्मा ने कहा कि मॉकड्रिल के दौरान कुछ खामियां सामने आई। बस गिरने की सूचना के बावजूद राहत एवं बचाव कर्मियों के पास मात्र सात स्ट्रेचर थे। जबकि इतने बड़े हादसे के दौरान कम से कम 25 या फिर इससे अधिक स्ट्रेचर होने चाहिए थे। इसके अलावा राहत एवं बचाव के लिए घटनास्थल पर टेंट लगाए गए, लेकिन टेंट में बैठने के लिए कुछ नहीं था। प्रत्येक टेंट में एक टेबल व कम से कम चार कुर्सियां होनी चाहिए थी। वहीं कुछ अन्य कमियां भी सामने आई हैं, जिसे जल्द दूर किया जाएगा।
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अफसरों में दिखा तालमेल का अभाव
मॉकड्रिल के दौरान अधिकारियों के बीच तालमेल का अभाव नजर आया। सूचना के आदान-प्रदान के लिए कोई सिग्नल सिस्टम नहीं था। देखने में आया कि पुलिस, एसडीआरएफ भी अपने-अपने स्तर से सूचनाओं का आदान-प्रदान करने में लगी थीं। राहत एवं बचाव कार्य में जुटने के बजाए अधिकारी अपने स्तर से सूचना देने में लगे रहे। अपर जिलाधिकारी रामजी शरण शर्मा ने कहा कि एसडीआरएफ को केवल अपने कमांडर एवं जिला आपदा परिचालन केंद्र को सूचना देनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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सही घटना स्थल का ही पता नहीं
जिला आपदा परिचालन केंद्र की ओर से बताया गया कि बस हादसा कुंडाधार के पास हुआ है, जबकि घटनास्थल पर पहुंचे अपर जिलाधिकारी ने पूछने पर बताया कि वास्तविक घटनास्थल कुंडाधार नहीं बल्कि अछरीखाल है। कुंडाधार इससे आठ किलोमीटर आगे है।
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सरकारी वाहन वाईआईपी ड्यूटी में, निजी से पहुंचे अधिकारी
मॉकड्रिल के दौरान एक और खामी देेखने को मिली। बताया गया कि केंद्रीय मंत्री उमा भारती के गुप्तकाशी से हरिद्वार जाने एवं अन्य वीआईपी के जनपद में होने से सरकारी वाहन वीआईपी ड्यूटी में थे, जिससे कुछ अधिकारियों को बस हादसे के दौरान अपने निजी वाहनों से घटनास्थल पर पहुंचना पड़ा। देवप्रयाग से कुछ पुलिस अधिकारी निजी वाहन से घटना स्थल पर पहुंचे।
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