ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
आध्यात्मिक ज्ञान से शांति प्राप्त होती है। जबकि समाज में रहने के लिए व्यावहारिक ज्ञान बेहद जरूरी है। भगवान को हमारा मन चाहिए, लेकिन हम उसके विपरीत मन संसार में लगाते हैं इसलिए हमें भगवान की कृपा नहीं मिल पाती।
ये बातें कथा वाचक उमाशंकर ने शुक्रवार को पीपल मंडी स्थित श्री सनातन धर्म सभा गीता भवन में आयोजित श्री राम चरितमानस कथा के दूसरे दिन कहीं। कथा वाचक उमाशंकर साकेत वासी परम भूषण पंडित राम किंकर महाराज के शिष्य हैं। कथा वाचक उमाशंकर ने आध्यात्मिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक ज्ञान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इंसान जैसा बीज बोेता है वैसा ही फ ल प्राप्त करता है। अत: जब हम दूसरों को दूसरों को शांति देंगे तभी हमें भी शांति मिलेगी। उन्होंने कहा कि भगवान वनवास के दौरान कोल-किरात जाति के लोगों के साथ कुटिया बनाकर रहते हैं ताकि उनकी राक्षसोें से रक्षा कर सकें। इस दौरान उन्होंने शक्ति और प्रभाव की चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारे स्वभाव का प्रभाव स्थायी रहता है। इसलिए भगवान श्री राम हमें उच्च आदर्श के साथ रहने के लिए प्रेरित करते है। वहीं विश्वास पैदा करने में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन विश्वास टूटने में पलभर लगता है। कथा में राकेश ओबराय, विपिन नागलिया, भपेंद्र चड्ढा, गुलशन खुराना, संजय शर्मा, अशोक गुप्ता, पंडित भगवती प्रसाद थपलियाल, मदन लाल, राज कुमार गोयल, अमर सिंह, गजेंद्र वासन, गंगाधर जोशी, जय भगवान अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।