ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
उत्तराखंड की हृदय शल्य चिकित्सा सेवाओं में एक बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। श्री महंत इंदिरेश अस्पताल के कॉर्डियक थोरेसिस वैस्क्यूलर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.अशोक जयंत की देखरेख में मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी (एमआईसीएस) तकनीक से हृदय शल्य चिकित्सा की जा रही है। बुधवार को हरिद्वार निवासी मरीज की एमआईसीएस विधि से हार्ट सर्जरी की गई। सर्जरी के बाद दिनेश बिल्कुल ठीक हैं। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनय राय प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि दिनेश सिंह (48) निवासी हरिद्वार को हृदय संबंधी परेशानी थी। रिपोर्ट में दो नसों की ब्लॉकेज सामने आई। उनकी दो बार विफ ल एंजियोप्लास्टी हो चुकी थी। श्री महंत इंदिरेश अस्पताल के वरिष्ठ हृदय शल्य चिकित्सक डॉ.अशोक कुमार जयंत की सलाह पर उन्होंने हार्ट सर्जरी कराई। डॉ.अशोक जयंत ने कहा कि सामान्य हार्ट सर्जरी में गर्दन के नीचे, छाती पर सामने की ओर आठ से 10 इंच का चीरा लगाना पड़ता है, जबकि एमआईसीएस सर्जरी में लगभग दो इंच का छोटा चीरा लगता है। सामान्य हार्ट सर्जरी में लंबी और जटिल प्रक्रिया के कारण मरीज को रिकवरी में लंबा समय लगता है, लेकिन एमआईसीएस सर्जरी के बाद मरीज अपेक्षाकृत कम समय में रिकवर हो जाती है। उन्होंने कहा कि एमआईसीएस सर्जरी के बाद कम समय में रिकवरी होती हैं और देखने पर यह भी पता नहीं चलता कि मरीज की हार्ट सर्जरी हो चुकी है। मीडिया से वार्ता के दौरान डॉ.पराग और डॉ.हरिओम भी मौजूद रहे।