ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। आधुनिक सुविधाओं के दावों के बाद भी शहर के सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाएं बेपटरी होती जा रही हैं। दून अस्पताल के बाद राजधानी के सबसे बडे़ गांधी शताब्दी अस्पताल की हालत भी दयनीय हो रही है। पानी की किल्लत के चलते यहां मरीजों से लेकर डॉक्टर तक परेशान हैं। नवजातों के इलाज के लिए निकू वार्ड की व्यवस्था न होने के कारण यहां कम महिलाएं ही प्रसव के लिए जाती हैं। इसके इतर मरीजों के बिस्तर की चादरों का हाल ऐसा है कि मानो महीनों से धुली न हों।
शहर का गांधी शताब्दी अस्पताल। दून अस्पताल पर बोझ पड़ा तो हर बार इस अस्पताल का बैक-अप के तौर पर नाम लिया जाता है। इस अस्पताल को लंबे समय से जिला अस्पताल के तौर पर भी विकसित करने की बात कही जाती है। बार-बार अपील की जाती है कि यहां की सुविधाओं का मरीज लाभ लें। बावजूद इसके यहां की हालत बद से बदतर हो रही है। हालात यह है कि 150 बेड के इस अस्पताल में सुविधाओं के अभाव में मरीज झांकने तक को तैयार नहीं हैं। इस नए अस्पताल भवन में साफ-सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है।
ऑपरेशन थिएटर तक में पानी नहीं
इस अस्पताल में पानी की व्यवस्था के लिए तीन तरीके हैं। सबमसिर्बल पंप के माध्यम से सप्लाई होती है, लेकिन उसकी मोटर खराब है। दूसरे भूमिगत टैंक से पानी सप्लाई भी इन दिनों ठप है। इसका कारण बताया जा रहा है कि किसी कर्मचारी से इसका वाल्व ही नहीं खोला जा रहा है। इसके अलावा टैंकरों से पानी सप्लाई का विकल्प अस्पताल में है लेकिन वो फिलहाल नाकाफी है।
नीकू वार्ड न होने से प्रसव से कतराती हैं महिलाएं
पिछले दिनों महिला दून अस्पताल में भीड़ बढ़ी तो विभाग ने अपील की थी कि महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा संख्या में गांधी शताब्दी अस्पताल में प्रसव के लिए लाया जाए। लेकिन, यहां नवजातों के इलाज के लिए नीकू वार्ड की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में नवजात की हालत खराब होने पर उसे फिर दून महिला या फिर किसी निजी अस्पताल में ले जाना पड़ता है। ऐसे में ज्यादातर परिवार प्रसव के लिए गांधी शताब्दी को तरजीह नहीं देते।
बिस्तर गंदे, सफाई पर ध्यान नहीं
तीन दिन पहले एक मरीज ने अपने बिस्तर को गंदा होने की शिकायत की थी। इस पर वार्ड ब्वॉय ने वहां एक के बाद एक तीन चादरें बदली, लेकिन हर चादर पर गंदगी के दाग साफ दिख रहे थे। इस पर मरीज ने ऊपर शिकायत की, लेकिन अधिकारियों ने भी इसी तरह की चादर उपलब्ध होने की बात कहते हुए कन्नी काट ली। इसके अलावा शौचालयों और परिसर की साफ-सफाई की व्यवस्था भी पटरी से उतरी हुई है।
आगे उम्मीद है....
- अस्पताल में नीकू वार्ड बनाने के लिए पांच लाख रुपये शासन से स्वीकृत हो चुके हैं। इसी साल इसके बनने की उम्मीद जताई जा रही है।
- महिलाओं के लिए चार बेड के आईसीयू के लिए धनराशि स्वीकृत हो चुकी है। उसके बाद 24 घंटे मौजूद रहने वाले स्टाफ की भर्ती होगी।
पानी की सप्लाई के लिए मोटर खराब हो गई है। जहां तक गंदगी का सवाल है तो कुछ शिकायतें मिली थी। मैं पिछले कुछ दिनों से बाहर था। सोमवार से यहां की व्यवस्थाएं पटरी पर लाने के निर्देश दिए जाएंगे। जहां तक नवजातों के इलाज की बात है तो जल्द निकू वार्ड यहां बनेगा। महिलाओं के लिए आईसीयू वार्ड का निर्माण भी जल्द किया जाएगा। दोनों सुविधाओं के लिए शासन से पैसा स्वीकृत हो चुका है। -डॉ. बीसी रमोला, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, गांधी शताब्दी अस्पताल