ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। कहने को नगर निगम प्रशासन ने ट्रांसपोर्ट नगर, चुक्खू मोहल्ला और लालपुल स्थित रैनबसेरे को 13 जून से पर्यटकों के निशुल्क ठहरने के लिए खोल दिए हैं। लेकिन, रविवार को तीनों ही रैन बसेरों में ताले लटके मिले। इसका खुलासा अमर उजाला टीम के निरीक्षण में हुआ।
प्रत्येक वर्ष तेजी से बढ़ती पर्यटकों की संख्या को देखते हुए नगर निगम ने रैन बसेरों को मुफ्त में खोलने की शानदार पहल की थी। मंशा थी कि पर्यटकों को विश्राम के लिए भटकना न पड़े। बावजूद इसके इनकी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं दिखा। इनमें साफ-सफाई तो दूर की बात है, जिन तीन रैन बसेरों में ये सुविधा दी जानी थी, उन तीनों में ही ताले लटके हुए हैं।
इतना ही नहीं अधिकारियों के निर्देश के बाद भी रेलवे स्टेशन, आईएसबीटी, मसूरी बस अड्डा और दून अस्पताल आदि के बाहर रैनबसेरों की जानकारी के बोर्ड तक नहीं लगे हुए हैं। यही वजह है कि लोगों को इसका पता ही नहीं है कि वह शहर में कहां-कहां निशुल्क ठहर सकते हैं?
(1) चुक्खु मोहल्ला रैन बसेरा : घंटाघर के पास चुक्खू मोहल्ला में बने रैन बसेरे में 100 लोगों के रुकने की व्यवस्था है। लेकिन, दोपहर एक बजे इसमें ताला लटका हुआ था। यहां मौजूद एक व्यक्ति ने बताया कि गार्ड कहीं बाहर गया हुआ है। उनके आने के बाद ही ताला खुलेगा। पूछने पर पता चला कि यहां शाम को ही लोग रुकने आते हैं।
(2) ट्रांसपोर्ट नगर रैन बसेरा : इसमें 50 लोगों के रुकने की व्यवस्था है। जब से ये रैन बसेरा बना है, तब से इसमें ताला लटका हुआ है। पिछले वर्ष दिसंबर में मेयर सुनील उनियाल गामा के निरीक्षण के दौरान भी यह बंद मिला था। अधिकारियों के निर्देश पर कुछ दिन खुलने के बाद फिर से यह बंद हो गया है।
(3) लालपुल रैन बसेरा : नगर निगम की ओर से बनाए गए इस हाईटेक रेनबसेरे में 139 लोगों के रुकने की व्यवस्था है। दावा है कि यहां कि सुविधाएं काफी बेहतर हैं। इसके बाद भी यहां न पर्यटक आते हैं और न बेसहारा लोग। इसकी वजह यहां ताला लटका होना है।
महिलाओं के लिए भी सुरक्षित नहीं रैन बसेरे
नगर निगम क्षेत्र में मौजूद इन रैन बसेरों में महिलाओं की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। न इनमें महिलाओं के लिए अलग रुकने की व्यवस्था है और न कोई महिला सुरक्षाकर्मी तैनात है। सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगे हैं। इसके अलावा महिलाओं के लिए अलग बिस्तर और चिकित्सा सुविधा भी नहीं है।
पर्यटकों की सहूलियत को देखते हुए रैन बसेरों में उनके मुफ्त ठहरने की व्यवस्था की गई थी। अगर रैन बसेरे बंद हैं तो ये गलत है। अधिकारियों को इनकी स्थिति चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए जाएंगे। अव्यवस्थाएं बर्दाश्त नहीं की जाएगी। -सुनील उनियाल गामा, मेयर