ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
पिटकुल के झाझरा स्थित 220 केवीए के पावर सब स्टेशन में 160 एमवीए के भारी भरकम ट्रांसफार्मर फुंकने की जांच पीजीसीआईएल (पॉवर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) के विशेषज्ञों ने पूरी कर ली है। पिटकुल सूत्रों के मुताबिक पीजीसीआईएल विशेषज्ञों की जांच में क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मर की मरम्मत नहीं होने की गुंजाइश बतायी गई है। ऐसे में ट्रांसफार्मर को आईएमपी कंपनी में ही भेजना होगा।
पीजीसीआईएल विशेषज्ञों के अलावा पिटकुल व आईएमपी कंपनी के विशेषज्ञों ने भी अपने स्तर पर क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मर की जांच की है। हालांकि प्रकरण को लेकर कोई भी अधिकारी व विशेषज्ञ कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। पीजीसीआईएल के विशेषज्ञों ने पिटकुल व ट्रांसफार्मर आपूर्तिकर्ता कंपनी आईएमपी को किसी भी प्रकार की रिपोर्ट देने से साफ इनकार कर दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि वे अपनी रिपोर्ट पीजीसीआईएल अधिकारियों को ही देंगे।
दूसरी ओर आईएमपी कंपनी क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मर की मरम्मत या फिर उसके बदले नया ट्रांसफार्मर देगी, इसकी संभावना कुछ कम ही है। कारण कि 160 एमवीए क्षमता का ट्रांसफार्मर कंपनी की ओर से 2014 में मुहैया कराया गया था और इसे 2016 में ऊर्जीकृत किया गया था। ट्रांसफार्मर की वारंटी तीन साल की थी। जबकि आपूर्ति किए जाने के बाद इसे दो साल तक प्रयोग में नहीं लाया गया। अब कंपनी वारंटी के तहत इसे बदलेगी इसकी संभावना न के बराबर है।
अधिकारियों की लापरवाही से वारंटी, ब्याज का नुकसान
पिटकुल अधिकारियों ने इस ट्रांसफार्मर को वर्ष 2012 में ही मंगा लिया था। इसे वर्ष 2014 में इस्तेमाल में लाया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि ट्रांसफार्मर को दो साल पहले क्यों मंगाया गया? यदि मंगाया गया तो इसे तत्काल प्रयोग में क्यों नहीं लाया गया। ऐसे में अधिकारियों, अभिभयंताओं ेके इस कदम से न सिर्फ 10 करोड़ कीमत के इस ट्रांसफार्मर की खरीदने में ब्याज का नुकसान हुआ, वरन इसके वारंटी पीरियड का भी नुकसान हुआ।
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पीजीसीआईएल विशेषज्ञों द्वारा क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मर की जांच पूरी कर ली गई है। हालांकि अभी रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस बात का पता चलेगा कि ट्रांसफार्मर में खराबी कैसे आयी? रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-नीरज पाठक, अधीक्षण अभियंता, पीआरओ पिटकुल