प्रदेश के दिव्यांगों को क्रिकेट में प्रतिभा दिखाने का मौका देने के लिए उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन फॉर दी फिजिकली चैलेंज्ड कमेटी का गठन किया गया। यह एसोसिएशन जिला व प्रदेश स्तर पर दिव्यांग क्रिकेट टीम का चयन करेगी, जिसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिलेगा।
सोमवार को किताबघर स्थित एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में ऑल इंडिया क्रिकेट एसोसिएशन नार्थ जोन के अध्यक्ष पद्म सिंह चौहान ने बताया कि फॉर दी फिजिकली चैलेंज्ड ऑल इंडिया क्रिकेट एसोसिएशन ने उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन फॉर दी फिजिकल चैलेंज्ड का गठन किया गया। जिसमें रूपचंद अध्यक्ष, अबरार अली उपाध्यक्ष, इमरान खान सचिव, अमित कुमार ठाकुर महासचिव, प्रीतम रांगड़ कोषाध्यक्ष, नरेंद्र मेलवाल संयोजक, सलीम अहमद प्रचार सचिव व जगदीश बाबला संरक्षक नियुक्त किए गए।
यह एसोसिएशन प्रदेश के शारीरिक रूप से अक्षम क्रिकेटरों को बढ़ावा देने, शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए क्रिकेट प्रतिभा को निखारना, शारीरिक रूप से अक्षम युवाओं के लिए राज्य स्तरीय कोचिंग शिविरों का आयोजन, राज्य स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित करने, उत्तर क्षेत्र टूर्नामेंट और अखिल भारतीय क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित करने में भी सहयोगी बनेगा।
चौहान ने बताया कि वर्ष 1988 में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान अजीत वाडेकर ने ऑल इंडिया क्रिकेट एसोसिएशन फॉर दी फिजिकल चैलेंज्ड का गठन किया था। जिसमें 40 प्रतिशत विकलांग पात्रता वाले क्रिकेट प्रेमी प्रतिभाग करते हैं। उन्होंने बताया कि आगामी अगस्त में इंग्लैंड में फिजिकली चैलेंज्ड खिलाड़ियों के लिए विश्वकप क्रिकेट प्रतियोगिता होनी है, जिसमें भारतीय टीम भी प्रतिभाग करेगी।
नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष रूपचंद ने कहा कि एसोसिएशन शीघ्र ही प्रदेश के सभी जिलों में समिति का गठन करेगी। जिससे प्रदेश के सभी जिलों में दिव्यांगों को खेल के प्रति जागरूक कर तैयार कर सके और दिव्यांग भी क्रिकेट के मैदान में अपनी प्रतिभा दिखा सकेंगे। इस अवसर पर ऑल इंडिया क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन को प्रतीक चिन्ह भेंट किया। इस मौके पर फिजिकल ट्रेनर तेजवीर सिंह, आरके आनंद, राजकुमार, एमएसए अध्यक्ष बीएस नेगी, सुरेश गोयल, शैलेंद्र बिष्ट आदि मौजूद रहे।
खेल मैदान का सपना नहीं हो सका पूरा
उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन फॉर दी फिजिकली चैलेंज्ड कमेटी के आगे सबसे बड़ी चुनौती मसूरी में कोई बड़ा खेल मैदान न होना है। जिससे खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। नगर में वर्ष 1979 में 3.6 हेक्टेयर में भिलाडू खेल मैदान बनाने की कवायद शुरू हुई थी जो विगत 40 वर्षो में भी पूरी नहीं हो सकी है। रूपचंद ने बताया कि वर्ष 2016-17 में खेल मैदान निर्माण के लिए करीब 49 लाख रुपये की स्वीकृति मिली थी। यह बजट मैदान में होने वाले कार्यों के लिए बहुत कम है। इससे मैदान के चारों और पिलर पिलर ही लगाए जा सके हैं।