न्यायिक अधिकारी अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए अपराधी को दंडित करें। विधि की शक्तियों से ही नागरिकों की स्वतंत्रता का संरक्षण हो सकता है। यह बातें उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एके सीकरी ने छात्रों से कहीं।
पूर्व न्यायाधीश ‘समानता : कानून के शासन को आगे बढ़ाने के लिए एक उपकरण’ विषय पर आयोजित सेमिवार में बोल रहे थे। सेमिनार में विभिन्न विवि और कॉलेजों के 400 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
इससे पहले विवि के चांसलर जितेंद्र जोशी ने पूर्व न्यायाधीश एके सीकरी का स्वागत किया। प्रोफेसर जज के रूप में विख्यात न्यायमूर्ति एके सीकरी ने सर्वप्रथम विधि का शासन एवं समानता के सिद्धांत को विस्तार से समझाया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आधार केस, ट्रांसजेंडर के अधिकारों का मामला, दिल्ली में पटाखों के मामले का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा की नागरिकों की स्वतंत्रता पर युक्तियुक्त पाबंदी केवल कानून बनाकर ही लगाई जा सकती है।
केवल सरकारी आदेश पर्याप्त नहीं है। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को सीख दी कि असीम विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए अपराधी को दंडित करते समय समानता के सिद्धांत को एक उपकरण के रूप में प्रयोग करते हुए विधि के शासन को स्थापित करने के लिए कार्य करें। लॉ कॉलेज प्राचार्य डॉ. राजेश बहुगुणा ने बताया कि न्याय, प्रशासन, नीति निर्धारण व दांडिक विधि जैसे क्षेत्रों में आज समानता के सिद्धांत का सफ ल प्रयोग किया जा रहा है। इस मौके पर डॉ. पूनम रावत भी मौजूद रहीं।