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कर्मचारी की बहाली नियम विरुद्ध

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प्रतीकात्मक तस्वीर
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर

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नगर पालिका में हुए तेल घोटाले के आरोप में निलंबित कर्मचारी को बहाल किए जाने पर आरअीआई कार्यकर्ता सहित सभासद ने पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने उपजिलाधिकारी से शिकायती पत्र सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
शिकायती पत्र में आरटीआई कार्यकर्ता आशीष पिपानिया और नगर पालिका सभासद अंकित जोशी ने बताया कि निलंबित कर्मचारी के खिलाफ जांच के लिए नगर पालिका प्रशासन की ओर से शहरी विकास मंत्रालय को लिखित सूचना दी गई थी, जो अभी तक विचाराधीन है। ऐसे में जांच पूरी हुए बिना कर्मचारी की सेवा बहाल किया जाना नियम विरुद्ध है। पत्र में बताया कि पालिका कर्मचारी पर में दो माह पूर्व डीजल की हेराफेरी का आरोप लगा था। पालिका प्रशासन ने विभागीय जांच के तहत आरोप सिद्ध होने के बाद कर्मचारी को निलंबित कर दिया था। इसके बाद कर्मचारी उच्च न्यायालय की शरण में गया। बताया कि न्यायालय ने 12 मार्च को पारित अपने आदेश में कहा कि आदेश पारित होने की तिथि से चार सप्ताह के अंदर निलंबित कर्मचारी द्वारा दाखिल जवाबदावा के अनुसार अधिशासी अधिकारी निर्णय पारित करें।
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आरटीआई कार्यकर्ता और सभासद ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश में कहीं भी कर्मचारी को शीघ्र बहाल करने को नहीं कहा गया है। बावजूद इसके शहरी विकास मंत्रालय की जांच पूरे हुए बिना ही पालिका प्रशासन ने निलंबित कर्मचारी की सेवा बहाल कर दी।

हाईकोर्ट के आदेश पर डीजीसीए की राय लेने के बाद ही कर्मचारी की सेवा बहाल की गई है।
- बीएल आर्य, अधिशासी अधिकारी

बहाली तथ्यों के आधार पर हुई है या नहीं। इसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
- कौस्तुभ मिश्र, उप जिलाधिकारी

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