ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
भूमि संरक्षण वन प्रभाग कालसी की तिमली रेंज अंतर्गत दिल्ली-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे जंगल में दवाइयों का जखीरा पड़ा मिला है। जो पहली नजर में दर्द निवारण के लिए प्रयुक्त होने वाला मलहम प्रतीत होता है। सभी दवाइयां एक्सपायरी डेट की हैं।
वहीं, कुछ दवाइयों के खाली रेपर भी मिले हैं, जिन्हें देखकर ऐसा लगता है कि बड़ी सावधानी से दवाइयां निकाली गईं हैं। इनके दोबारा उपयोग की आशंका भी जताई जा रही है। जंगल किनारे पड़ा दवाइयों का यह जखीरा वन्य जीवों के लिए भी खतरा साबित हो सकता है। जंगल में पड़ा डाईक्लोविन और अन्य सभी मलहम हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब और हरियाणा से निर्मित हैं।
आबादी क्षेत्र से दूर तिमली रेंज में पड़ा यह जखीरा जंगली जानवरों को भी खतरा बना हुआ है। तिमली रेंज में वन्य जीवों की भी कई प्रजातियां पाई जाती हैं। अधिकांश जंगली जानवर एनएच किनारे विचरण करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग तक आ जाते हैं। ऐसे में जंगली जानवरों के लिए दवाएं खतरा साबित हो सकती हैं। उधर, सीएमओ डॉ. एसके गुप्ता ने बताया कि प्रकरण की जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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अक्सर बुखार और अन्य दर्द में डाईक्लोविन टेबलेट और मलहम का उपयोग किया जाता है। डाईक्लोविन गिद्द के लिए हानिकारक है, इससे उसके लीवर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। कई बार यह दवा दिए जाने के बाद जानवरों की मौत हो जाती है। उसके शरीर में डाइक्लोविन बना रहता है, एसे में पशु का शव खाने से गिद्द की मौत हो सकती है। इसीलिए जानवरों के उपचार में डाईक्लोविन को प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही दर्दनाशक और अन्य दवाइयां भी अधिक मात्रा में खाने पर जानवर की मौत हो सकती है।
- डॉ. सतीश जोशी, पशु चिकित्साधिकारी, विकासनगर